भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) की मसौदा योजना के अनुसार, भारत का लक्ष्य 2047 तक अपने हवाई अड्डों की संख्या को दोगुना करके 300 करना है, जो यात्री यातायात में अपेक्षित आठ गुना वृद्धि को देखते हुए संभव है।
इस विस्तार को प्रेरित करने वाले कारक
मौजूदा हवाई पट्टियों का विकास:
- भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण(AAI) 70 हवाई पट्टियों को A320 या B737 जैसे संकीर्ण अवसंरचना वाले विमानों को संभालने में सक्षम हवाई अड्डों के रूप में विकसित करने की योजना बना रहा है।
- मांडवी (गुजरात), सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश), तुरा (मेघालय) और छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश) में मौजूदा हवाई पट्टियों को छोटे विमानों के लिये उन्नत किया जा सकता है। छोटे विमानों को समायोजित करने हेतु लगभग 40 हवाई पट्टियाँ विकसित की जानी हैं।
- यदि मौजूदा हवाई पट्टियों का विकास नहीं किया जा सकता है अथवा 50 किलोमीटर के भीतर कोई नागरिक हवाई अड्डा नहीं है तो नए हवाई अड्डे बनाए जाएंगे।
- नए ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे कोटा (राजस्थान), परंदूर (तमिलनाडु), कोट्टायम (केरल), पुरी (ओडिशा), पुरंदर (महाराष्ट्र), कार निकोबार एवं मिनिकॉय (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह) में बनाए जा सकते हैं।
- अनुमानित यात्री यातायात वृद्धि: वर्ष 2047 तक यात्री यातायात में आठ गुना वृद्धि होने की आशा है, जो 376 मिलियन से बढ़कर 3-3.5 बिलियन वार्षिक हो जाएगा। इस वृद्धि में अंतर्राष्ट्रीय यातायात का योगदान 10-12% प्राप्त सकता है।
- यह योजना विज़न 2047 का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य हवाई यात्रा की मांग में भारी वृद्धि को समायोजित करना है।
उड़ान योजना कार्यान्वयन
- उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) जैसी योजनाओं के माध्यम से टियर-II और टियर-III शहरों में कनेक्टिविटी में सुधार करना।
- वर्ष 2014 में, 74 परिचालन हवाई अड्डे थे, जो अब बढ़कर 148 हो गए हैं। उड़ान योजना के तहत, 58 हवाई अड्डों, 8 हेलीपोर्ट तथा 2 जल हवाई अड्डों सहित 68 कम सेवा वाले/असेवित गंतव्यों को जोड़ा गया है। इसने 29 से अधिक राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को हवाई कनेक्टिविटी विकसित हुई है।
- भारत का विमानन अवसंरचना हवाई अड्डों पर अत्यधिक भीड़भाड़ वाला है। हवाई यात्रा की मांग में वृद्धि के साथ, देश भर के प्रमुख हवाई अड्डे अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक परिचालन कर रहे हैं।
आय का बढ़ता स्तर
- वर्ष 2047 तक भारत की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि होने का अनुमान है, प्रति व्यक्ति आय 18,000 से 20,000 अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने की आशा है। यह आर्थिक वृद्धि विमानन विस्तार को बढ़ावा देने वाला एक महत्त्वपूर्ण कारक भी है।
- अधिक व्यय योग्य आय के कारण जनसंख्या के एक बड़े भाग के लिये हवाई यात्रा अधिक किफायती हो जाती है।
- बढ़ता हुआ मध्यम वर्ग व्यवसाय और अवकाश दोनों के लिये अन्य परिवहन साधनों की अपेक्षा हवाई यात्रा को प्राथमिकता देगा।
- आर्थिक विकास के परिणामस्वरूप बढ़ी हुई व्यावसायिक गतिविधियाँ तथा पर्यटन से हवाई यात्रा की मांग में और वृद्धि होगी।
एयर कार्गो में प्रत्याशित वृद्धि
- हालाँकि यात्री के यातायात का ध्यान देना प्राथमिक है, लेकिन विस्तृत होते एयर कार्गो क्षेत्र को भी ध्यान में रखा गया है।
- ई-कॉमर्स का विकास कुशल हवाई माल ढुलाई सेवाओं की मांग को बढ़ा रहा है।
- भारत का लक्ष्य वैश्विक एयर कार्गो बाज़ार में एक प्रमुख अभिकर्त्ता बनना है।
- नए और विस्तारित हवाई अड्डों में कार्गो-हैंडलिंग क्षमता में वृद्धि होगी।
प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय केंद्रों का विकास
- भारत का लक्ष्य अपने प्रमुख हवाई अड्डों को अंतर्राष्ट्रीय केंद्रों के रूप में स्थापित करना है, ताकि वे मध्य पूर्व और दक्षिण पूर्व एशिया के स्थापित केंद्रों के साथ प्रतिस्पर्द्धा कर सकें।
- यह आकांक्षा मौजूदा हवाई अड्डों के विस्तार और आधुनिकीकरण के साथ-साथ नए हवाई अड्डों के विकास को भी प्रेरित कर रही है, ताकि अधिकाधिक अंतर्राष्ट्रीय एयरलाइनों तथा यात्रियों को आकर्षित किया जा सके, पारगमन यातायात में वृद्धि हो एवं भारत में पर्यटन और व्यावसायिक यात्रा को बढ़ावा मिले।
- हवाई यात्रा की कम पहुँच: भारत का विमानन बाज़ार विश्व के सबसे बड़े बाज़ारों में से एक है, लेकिन विकसित देशों की तुलना में भारत में हवाई यात्रा की पहुँच अभी भी कम है।
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI)
- भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (Airports Authority of India- AAI) भारत सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के अंतर्गत एक सांविधिक निकाय है। इसका गठन वर्ष 1995 में राष्ट्रीय हवाई अड्डा प्राधिकरण और भारतीय अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा प्राधिकरण को मिलाकर किया गया था।
- यह भारतीय हवाई क्षेत्र और आस-पास के समुद्री क्षेत्रों में हवाई यातायात प्रबंधन सेवाएँ भी प्रदान करता है।
- AAI के कार्यों में हवाई अड्डे का विकास, हवाई क्षेत्र नियंत्रण, यात्री और कार्गो टर्मिनल प्रबंधन तथा संचार एवं नेविगेशन सहायता का प्रावधान शामिल हैं।
- AAI 2.8 मिलियन वर्ग समुद्री मील हवाई क्षेत्र में हवाई नेविगेशन सेवाएँ प्रदान करता है।
