भारत ने हाल ही में कोडेक्स एलीमेंटेरियस कमीशन की कार्यकारी समिति के 86वें सत्र में भाग लिया है।इस सत्र में भारत ने मसालों के मानकों की गुणवत्ता मानकों जैसे कि छोटी इलायची, वेनिला और हल्दी के मानकों को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन मसालों के महत्वपूर्ण उत्पादक और निर्यातक के रूप में, भारत की भागीदारी अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण है। भारत ने नामित वनस्पति तेलों के मानकों के प्रगति को समर्थन दिया है, जिसके तहत शिगा टॉक्सिन-उत्पादक एशेरिकिया कोलाइ को नियंत्रित करने के लिए दिशा-निर्देशिकाएँ और खाद्य उत्पादन और प्रसंस्करण में पानी के सुरक्षित उपयोग और पुनः प्रयोग के मानकों के लिए भी समर्थन और सहमति व्यक्त किया है।
कोडेक्स एलिमेंटेरियस कमीशन
- कोडेक्स एलिमेंटेरियस कमीशन (CAC) एक अंतर्राष्ट्रीय खाद्य मानक निकाय है।
- इस निकाय का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा करना और खाद्य व्यापार में उचित प्रथाओं की सुनिश्चितता को तय करना है।
- इस अंतर्राष्ट्रीय संगठन को मई 1963 में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (Food and Agriculture Organisation – FAO) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation-WHO) द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित किया गया था।
- इसके तहत विभिन्न खाद्य मानक, दिशा-निर्देश, और अभ्यास संहिताएं तैयार की जाती हैं।
- इसके तहत तय किए गए मानकों और संहिताएं आमतौर पर स्वच्छता अभ्यास, लेबलिंग, संदूषक, योजक, निरीक्षण, प्रमाणन, पोषण, और पशु चिकित्सा दवाओं और कीटनाशकों के अवशेषों से निपटने के लिए लागू होती हैं।
- वर्तमान में CAC में कुल 189 सदस्य हैं, जिसमें 188 देश और यूरोपीय संघ शामिल हैं।
- भारत सन 1964 में CAC का सदस्य बना था।
- कोडेक्स के तहत कमोडिटी मानक विशिष्ट उत्पादों को संदर्भित करते हैं, जबकि क्षेत्रीय मानक संबंधित क्षेत्रों पर लागू होते हैं।
CAC की कार्यकारी समिति का 86वाँ सत्र
- भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के CEO के नेतृत्व में भारत ने रोम स्थित FAO मुख्यालय में आयोजित कोडेक्स एलिमेंटेरियस आयोग की कार्यकारी समिति (CCEXEC) के 86वें सत्र में सक्रिय रूप से भागीदारी की।
- CCEXEC का प्रमुख कार्य नए कार्य प्रस्तावों की समीक्षा और मानक विकास की प्रगति की निगरानी करना है।
- कोडेक्स एलिमेंटेरियस आयोग की कार्यकारी समिति (CCEXEC) के 86वें सत्र के दौरान, भारत ने छोटी इलायची, हल्दी और वेनिला सहित विभिन्न मसालों के मनको के विकास के लिए जोरदार समर्थन किया।
- यह पहल भारत के लिए विशेष महत्त्व रखती है, क्योंकि भारत इन मसालों का प्रमुख उत्पादक और निर्यातक है। अतः इससे भारत को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में आसानी होगी।
- इसके अलावा, भारत ने वनस्पति तेलों के लिए मानकों की प्रगति, शिगा टॉक्सिन उत्पादन करने वाले एस्चेरिचिया कोलाई (Shiga Toxin-Producing Escherichia Coli) के नियंत्रण हेतु दिशा-निर्देशों, और खाद्य उत्पादन एवं प्रसंस्करण में पानी के सुरक्षित उपयोग और पुनः उपयोग का समर्थन किया।
- भारत ने खाद्य पैकेजिंग में पुनर्नवीनीकृत सामग्रियों के उपयोग से संबंधित खाद्य सुरक्षा विचारों पर कोडेक्स द्वारा एक मार्गदर्शन विकसित करने के प्रस्ताव का भी समर्थन किया।
- यह पहल जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और स्थिरता जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- अंततः, भारत ने खाद्य संपर्क अनुप्रयोगों के लिए पोस्ट उपभोक्ता PET (पॉलीइथिलीन टेरेफ्थेलेट) के पुनर्चक्रण पर FSSAI द्वारा विकसित दिशा-निर्देशों के साथ अपने अनुभव साझा किए।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण
- भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) एक स्वायत्त वैधानिक निकाय है।
- भारत में इसे खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत स्थापित किया गया है।
- यह निकाय भारत के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन काम करता है।
- यह भारत में खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता को विनियमित तथा पर्यवेक्षण करके सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा और संवर्द्धन के लिए एक जिम्मेदार निकाय है।
- FSSAI का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है और इसके छह क्षेत्रीय कार्यालय दिल्ली, गुवाहाटी, मुंबई, कोलकाता, कोचीन और चेन्नई में स्थित है।
- भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण राज्यों के खाद्य सुरक्षा अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों को लागू करने का कार्य करता है।
- FSSAI मानव उपभोग के लिये पौष्टिक खाद्य पदार्थों के उत्पादन, भंडारण, वितरण, बिक्री और आयात की सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करने का कार्य करता है।
- इसके अलावा यह देश के सभी राज्यों, ज़िला एवं ग्राम पंचायत स्तर पर खाद्य पदार्थों के उत्पादन और बिक्री के निर्धारित मानकों को बनाए रखने में सहयोग करता है।
- यह समय-समय पर खुदरा एवं थोक खाद्य-पदार्थों की गुणवत्ता की भी जाँच करता है।
- इसका मुख्य उद्देश्य खाद्य सामग्री के लिए वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित मानकों का निर्माण करना है और खाद्य पदार्थों के उत्पादन, भंडारण, वितरण, बिक्री और आयात को नियंत्रित करने के माध्यम से मानव-उपभोग के लिए सुरक्षित और संपूर्ण आहार की उपलब्धि सुनिश्चित करना है।
