Wed. Jun 10th, 2026

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की वन सलाहकार समिति (FAC) ने पुरी में प्रस्तावित श्री जगन्नाथ अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण के लिये वन भूमि पर बिना अनुमति के दीवारें बनाने के लिये ओडिशा सरकार को फटकार लगाई।

वन सलाहकार समिति

  • यह एक वैधानिक निकाय है जिसका गठन वन (संरक्षण) अधिनियम,1980 द्वारा किया गया था।
  • यह पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) के अंतर्गत आता है।
  • FAC उन औद्योगिक परियोजनाओं का मूल्यांकन करता है जिनके कार्यकलापों के लिये वन भूमि की आवश्यकता होती है।
  • समिति को विशिष्ट आवश्यकताओं के अधीन वन भूमि के परिवर्तन को अनुमोदित करने, अस्वीकार करने या अनुमति प्रदान करने का अधिकार है।
  • हाल ही में प्राप्त उपग्रह चित्रों से पता चला कि परियोजना की प्रबंधन एजेंसी द्वारा  FAC की मंज़ूरी प्राप्त करने से पहले ही दीवार का निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया था।

वन संरक्षण अधिनियम, 1980

  • वन संरक्षण अधिनियम 1980 को वन-संबंधी कानूनों को सुव्यवस्थित करने, वनों की कटाई को विनियमित करने, वन उत्पादों के परिवहन की निगरानी करने तथा लकड़ी एवं अन्य वन उत्पादों पर शुल्क लगाने हेतु अधिनियमित किया गया था।
  • इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत, गैर-वनीय उद्देश्यों के लिये वन भूमि के परिवर्तन हेतु केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति आवश्यक है।
  • यह मुख्य रूप से भारतीय वन अधिनियम, 1927 अथवा वर्ष 1980 के राज्य अभिलेखों द्वारा मान्यता प्राप्त वन भूमि पर लागू होता था।
  • सर्वोच्च न्यायालय की व्याख्या: सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 1996 में दिये गए गोदावर्मन निर्णय में वर्गीकरण या स्वामित्व की परवाह किये बिना वनों के संरक्षण का आदेश दिया गया।
  • इसने वनों या वन जैसे भू-भागों की अवधारणा को प्रस्तुत किया, जो वनों के मिलते-जुलते क्षेत्रों को संदर्भित करता है, लेकिन सरकारी या राजस्व अभिलेखों में आधिकारिक तौर पर इस रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है। इससे “डीम्ड फॉरेस्ट” या ऐसे क्षेत्रों का विचार सामने आया जो वनों के समान होते हैं, लेकिन सरकारी या राजस्व अभिलेखों में औपचारिक रूप से वनों के रूप में निर्दिष्ट नहीं हैं।
  • वनों की भिन्न-भिन्न परिभाषाओं के संबंध में चिंता: भारत में राज्य सर्वेक्षणों और विशेषज्ञ रिपोर्टों के आधार पर ‘वनों’ की अलग-अलग व्याख्या करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप भिन्न-भिन्न परिभाषाएँ सामने आती हैं।
  • उदाहरण के लिये, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश अपनी परिभाषाओं को आकार, वृक्ष घनत्व तथा प्राकृतिक वृद्धि के आधार पर निर्धारित करते हैं, जबकि गोवा वन प्रजातियों के कवरेज पर निर्भर करता है।
  • विभिन्न परिभाषाओं के अनुरूप अनुमानित वन क्षेत्र भारत के आधिकारिक वन क्षेत्र का 1% से 28% तक है।

वन संरक्षण अधिनियम में हालिया संशोधन

  • हाल ही में पारित वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2023 का उद्देश्य इस क्षेत्र में स्पष्टता लाना तथा वनों से संबंधित चिंताओं का समाधान करना है।
  • इसमें अधिनियम के दायरे में वन भूमि के दायरे को परिभाषित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया तथा भूमि की कुछ श्रेणियों को इसके प्रावधानों से छूट दी गई।
  • इसमें सड़कों और रेलमार्गों के साथ संपर्क के प्रयोजनों के लिये 0.10 हेक्टेयर तक वन भूमि, सुरक्षा संबंधी बुनियादी ढाँचे के लिये 10 हेक्टेयर तक तथा सार्वजनिक उपयोगिता परियोजनाओं के लिये वामपंथी उग्रवाद प्रभावित ज़िलों में 5 हेक्टेयर तक वन भूमि को छूट दी गई है।
  • हालाँकि सर्वोच्च न्यायालय के अंतरिम निर्देश में वन प्रशासन के प्रति पारंपरिक दृष्टिकोण को बरकरार रखा गया है, जिस पर केंद्र द्वारा हाल ही में किये गए संशोधन का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
  • इसके अलावा, सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी निर्णय दिया कि किसी भी सरकार या प्राधिकरण द्वारा चिड़ियाघर या सफारी के निर्माण के लिये अंतिम मंज़ूरी न्यायालय से लेनी होगी।

Login

error: Content is protected !!