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विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization- WHO) ने वैश्विक ट्रांस वसा या ट्रांस फैट उन्मूलन की दिशा में प्रगति पर फिफ्ट माइलस्टोन रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें वर्ष 2018-2023 की अवधि शामिल है।एक अन्य घटनाक्रम में, लैंसेट ग्लोबल हेल्थ जर्नल में एक लेख प्रकाशित हुआ, जो बताता है कि वर्ष 2022 में भारत में लगभग 50% वयस्क अपर्याप्त स्तर की शारीरिक गतिविधियों में संलग्न होंगे।

ट्रांस फैट पर WHO रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएँ

  • औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस फैट एसिड (TFA) को हृदय रोग के लिये प्रमुख कारण माना जाता है। TFA से कोई पोषण संबंधी लाभ नहीं मिलता है और यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है।
  • वर्ष 2018 में WHO ने वर्ष 2023 के अंत तक वैश्विक खाद्य आपूर्ति से TFA को खत्म करने का लक्ष्य रखा था। हालाँकि लक्ष्य पूरी तरह से पूरा नहीं हुआ, लेकिन उल्लेखनीय प्रगति हुई है और वर्ष 2025 तक निरंतर उन्मूलन हासिल कर लिया जाएगा।
  • वर्ष 2023 तक, विश्व स्वास्थ्य संगठन के REPLACE एक्शन फ्रेमवर्क ने 53 देशों में सर्वोत्तम अभ्यास नीतियों को व्यापक रूप से अपनाने में मदद की, जिससे 3.7 बिलियन लोग प्रभावित हुए, जो पाँच साल पहले 6% कवरेज से काफी अधिक है।
  • WHO ने TFA उन्मूलन लक्ष्य प्राप्त करने वाले देशों को मान्यता देने के लिये एक सत्यापन कार्यक्रम शुरू किया। डेनमार्क, लिथुआनिया, पोलैंड, सऊदी अरब और थाईलैंड TFA सत्यापन प्रमाण-पत्र प्राप्त करने वाले पहले देश थे।
  • WHO सभी देशों को सर्वोत्तम अभ्यास नीतियों को लागू करने, सत्यापन कार्यक्रम में शामिल होने और कंपनियों को वैश्विक स्तर पर TFA को खत्म तथा उत्पादों को फिर से तैयार करने के लिये प्रोत्साहित करने की सिफारिश करता है।
  • केवल आठ अतिरिक्त देशों (अज़रबैजान और चीन सहित) में सर्वोत्तम अभ्यास नीतियों को लागू करने से वैश्विक TFA बोझ का 90% समाप्त हो जाएगा।

अपर्याप्त शारीरिक गतिविधि पर लैंसेट पेपर के मुख्य

  • अपर्याप्त शारीरिक गतिविधि की परिभाषा यह है कि प्रति सप्ताह कम-से-कम 150 मिनट मध्यम-तीव्रता या 75 मिनट तीव्र-तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि नहीं की जाती।
  • वैश्विक स्तर पर, वर्ष 2022 में लगभग एक तिहाई (31.3%) वयस्क अपर्याप्त रूप से शारीरिक रूप से सक्रिय थे, जबकि वर्ष 2010 में यह संख्या 26.4% थी।
  • वयस्कों में अपर्याप्त शारीरिक गतिविधि के मामले में दक्षिण एशिया, उच्च आय वाले एशिया प्रशांत क्षेत्र के बाद, विश्व स्तर पर दूसरे स्थान पर है। भारत में, 57% महिलाएँ अपर्याप्त रूप से शारीरिक रूप से सक्रिय पाई गईं, जबकि पुरुषों में यह आँकड़ा 42% था।
  • अनुमानों से पता चलता है कि यदि वर्तमान रुझान जारी रहा तो वर्ष 2030 तक 60% भारतीय वयस्क अपर्याप्त रूप से सक्रिय हो सकते हैं।
  • शारीरिक निष्क्रियता मधुमेह और हृदय रोग जैसी गैर-संचारी रोगों के जोखिम को बढ़ाती है। शारीरिक निष्क्रियता में वृद्धि, साथ ही गतिहीन जीवनशैली, इन रोगों के प्रसार में योगदान देती है और स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों पर बोझ डालती है।

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