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इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राफी (EEG) जर्मन फिजियोलॉजिस्ट हैंस बर्जर द्वारा विकसित प्रथम मानव EEG के शताब्दी वर्ष के कारण चर्चा में रही है।व्लादिमीर प्राव्दिच-नेमिंस्की ने वर्ष 1912 में एक कुत्ते के मस्तिष्क से पहला स्तनधारी EEG प्राप्त किया, इसके बाद वर्ष 1924 में हंस बर्गर ने पहला मानव EEG प्राप्त किया।

इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राफी (EEG)

  • EEG का मतलब इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राफी है। ‘इलेक्ट्रो-’ बिजली से संबंधित है; ‘-एन्सेफेलो-’ मस्तिष्क को संदर्भित करता है और ‘-ग्राफी’ एक प्रत्यय है जिसका अर्थ है दिखाना या प्रतिनिधित्व करना।
  • EEG भौतिकी और तंत्रिका जीव विज्ञान में एक उल्लेखनीय उपकरण है, जो आक्रामक प्रक्रियाओं के बिना मानव मस्तिष्क के कार्य करने की स्थिति दर्शाता है।
  • EEG सेटअप सरल, लागत प्रभावी, गैर-आक्रामक, पोर्टेबल, स्थान-कुशल है और MRI के विपरीत उच्च-ऊर्जा विकिरण या ध्वनि उत्सर्जित नहीं करता है।

कार्यविधि

  • आयतन चालन वह इंटरफेस है जो विद्युत विभव के स्रोत और उसको मापने वाले इलेक्ट्रोड के बीच होता है।
  • यह तब होता है जब विद्युत विभव को उसके स्रोत से कुछ दूरी पर मापा जाता है।
  • मस्तिष्क में न्यूरॉन लगातार अपने आस-पास के वातावरण के साथ आयनों का आदान-प्रदान करते हैं, जिससे विद्युत गतिविधि की तरंगें उत्पन्न होती हैं, जो खोपड़ी पर स्थित इलेक्ट्रोडों को इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम उत्पन्न करने के लिये प्रेरित करती हैं।

अनुप्रयोग

  • यह मिर्गी (मस्तिष्क से जुड़ी एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति जो लोगों को बार-बार बिना किसी कारण के दौरे पड़ने के लिये अतिसंवेदनशील बनाती है) का निदान करने के लिये उपलब्ध सबसे अच्छा परीक्षण है।
  • ईईजी परीक्षण एनेस्थीसिया, नींद के पैटर्न, कोमा के दौरान न्यूरोलॉजिकल गतिविधि और ऑक्सीजन की उपलब्धता के प्रभावों को भी प्रकट कर सकता है।
  • EEG मस्तिष्क की मृत्यु की पुष्टि करने में भी मदद कर सकता है।
  • तंत्रिका विज्ञान, संज्ञानात्मक मनोविज्ञान, न्यूरोलिंग्विस्टिक्स और न्यूरोमार्केटिंग अध्ययनों तथा मस्तिष्क-कंप्यूटर इंटरफेस विकसित करने के लिये भी इसका उपयोग किया जाता है।
  • शोधकर्त्ताओं ने EEG डेटा को विभिन्न मस्तिष्क गतिविधियों से जोड़ा है, जो सामान्य और असामान्य स्थितियों के बीच प्रभावी रूप से अंतर करते हैं।

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