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राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग-राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (UGC-NET) परीक्षा के पेपर परीक्षा से पूर्व ही डार्क वेब पर लीक हो गए, जिससे देश भर में विरोध और समस्याएँ उत्पन्न हुई।

डार्क नेट

  • डार्क नेट इंटरनेट का एक छिपा हुआ भाग है जो नियमित सर्च इंजन की पहुँच से परे होते हैं। इसे सिर्फ टोर (द ओनियन राउटर) जैसे विशेष ब्राउज़र का उपयोग करके एक्सेस किया जा सकता है।
  • इसे आरंभ में मुख्य रूप से सरकारी और सैन्य उपयोग के लिये सुरक्षित एवं निजता संबंधी संचार की सुविधा के लिये विकसित किया गया था।
  • हालाँकि, हाल ही में यह अवैध हथियारों और ड्रग्स की बिक्री जैसी आपराधिक गतिविधियों से जुड़ गया है।
  • डार्क नेट पर संचार को एन्क्रिप्टेड किया जाता है, जिससे प्रेषक और रिसीवर के बीच संचार का कोई संकेत शेष नहीं रह जाता है, जिससे यूजर के लिये उच्च निजता सुनिश्चित होती है।
  • भारतीय कानून के अनुसार डार्क नेट के उपयोग या पहुँच को दंडनीय नही है, क्योंकि भारत में इसका उपयोग वैध है। हालाँकि, अवैध उद्देश्यों के लिये इसका उपयोग करना कानून के तहत दंडनीय है।

क्या भारत में डार्क वेब तक पहुंच कानूनन वैध

  • भारत में डार्क वेब तक पहुंचना कानूनी है।
  • भारत सरकार इसे अवैध गतिविधि के रूप में नहीं मानती है।
  • हालाँकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति जो चाहे वह कर सकता है।
  • बाल पोर्नोग्राफी, बंदूकें, पिस्तौलें, राइफलें, ड्रग्स आदि खरीदने जैसी गतिविधियाँ अवैध मानी जाती हैं। इसलिए, डार्क वेब खुद अवैध नहीं है, लेकिन इसका उपयोग करते समय किसी व्यक्ति की गतिविधि या इरादे को ध्यान में रखा जाता है।
  • भारतीय कानून के अनुसार डार्क वेब के उपयोग या पहुंच को दंडनीय नहीं माना गया है, क्योंकि भारत में इसका उपयोग वैध है।
  • अवैध उद्देश्यों के लिए इसका उपयोग करना भारत के कानून के तहत दंडनीय है।

भारत में डार्क वेब को विनियमित करने में नियामक चुनौतियाँ

  • एन्क्रिप्शन तकनीक और गुमनामी : डार्क वेब की सबसे बड़ी चुनौती इसकी मजबूत एन्क्रिप्शन तकनीकों और उपयोगकर्ताओं की गुमनामी में निहित है।
  • क्रिप्टोकरेंसी में लेनदेन : डार्क वेब पर अधिकांश वित्तीय लेनदेन क्रिप्टोकरेंसी में किए जाते हैं, जो अतिरिक्त गुमनामी प्रदान करते हैं और लेनदेन को ट्रेस करना कठिन बना देते हैं।
  • सीमापारीय प्रकृति : डार्क वेब की सीमापारीय प्रकृति मामले को और जटिल बना देती है, क्योंकि इसमें विभिन्न देशों के उपयोगकर्ता शामिल होते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पड़ती है।
  • सूचना की स्वतंत्रता और ऑनलाइन गोपनीयता के अधिकार को सुनिश्चित करना : डार्क वेब पर पनप रही अवैध गतिविधियों को समाप्त करना और साथ ही सूचना की स्वतंत्रता और ऑनलाइन गोपनीयता के अधिकार को सुनिश्चित करना भी एक बड़ी चुनौती है।

डार्क नेट के संभावित खतरे

  • पहचान का दुरुपयोग : डार्कनेट पर लॉग-इन विवरण और अन्य व्यक्तिगत जानकारी की खरीददारी की जाती है, जिसका दुरुपयोग नकली पहचान बनाने, वित्तीय धोखाधड़ी और अन्य अपराधों के लिए किया जाता है। इसके अलावा, डार्कनेट पर ऐसे डेटा की उपलब्धता हो सकती है जो अन्य प्रथाओं में भी उपयोग हो सकता है।
  • मैलवेयर और रैनसमवेयर : डार्क नेट का एक और खतरा मैलवेयर और रैनसमवेयर है। ज़्यादातर मैलवेयर डार्क नेट पर प्रसारित होते हैं और फिर सार्वजनिक एक्सेस वाली वेबसाइटों पर इस्तेमाल किए जाते हैं, इसलिए डार्कनेट पर होने से मैलवेयर या रैनसमवेयर के संपर्क में आने का ख़तरा हो सकता है जो किसी व्यवसाय को नुकसान पहुंचा सकता है या किसी की पहचान चुरा सकता है।
  • ड्रग तस्करी : डार्कनेट ड्रग डीलरों के लिए एक प्रमुख आश्रय स्थल है, जो बेधड़क डार्कनेट पर मादक पदार्थों को बेचते हैं। डार्कनेट पर ड्रग्स और अन्य अवैध सामग्री की वितरण की जानकारी भी उपलब्ध हो सकती है।
  • आतंकवाद : डार्कनेट आतंकवादियों के लिए एक स्थान हो सकता है जहां वे जानकारी बांट सकते हैं, आतंकवादियों की भर्ती कर सकते हैं और आतंकवादी गतिविधियों और अन्य अपराधों के लिए  योजना बना सकते हैं। आतंकवादी बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टो-मुद्राओं का उपयोग करके विस्फोटक और हथियारों की अवैध खरीद के लिए भी डार्कनेट का उपयोग करते हैं।
  • चाइल्ड पोर्नोग्राफी : डार्कनेट का इस्तेमाल तस्करी, चाइल्ड पोर्नोग्राफी और अन्य अपराधों के लिए किया जाता रहा है। डार्क वेब चाइल्ड पोर्नोग्राफी वेबसाइट के उपयोगकर्ताओं का पता लगाने के लिए हुए एक अंतरराष्ट्रीय जांच में अमेरिका में तक़रीबन 337 लोगों की गिरफ्तारियाँ हुई हैं।

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