भारत सरकार ने केंद्र प्रायोजित स्मार्ट सिटीज़ मिशन को 31 मार्च 2025 तक बढ़ा दिया है। यह योजना मूल रूप से 30 जून 2024 को समाप्त होनी थी।राज्य सरकारों के अनुरोध पर केंद्र सरकार द्वारा इस योजना का विस्तार किया गया था। लेकिन अब कोई भी नई परियोजना स्वीकृत नहीं की जाएगी और मौजूदा स्वीकृत परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा।
स्मार्ट सिटीज़ मिशन
- यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसे जून 2015 में “स्मार्ट सॉल्यूशंस” के अनुप्रयोग के माध्यम से नागरिकों को जीवन की गुणवत्ता एवं स्वच्छ तथा संवहनीय वातावरण प्रदान करने के लिये, 100 शहरों के आवश्यक बुनियादी ढाँचे को बदलने के लिये प्रारंभ किया गया था।
- इसका उद्देश्य सतत् और समावेशी विकास के माध्यम से नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है।
SCM के घटक
क्षेत्र-आधारित विकास
- पुनर्विकास (शहर नवीनीकरण): बुनियादी ढाँचे और सुविधाओं में सुधार के लिये मौजूदा शहरी क्षेत्रों का नवीनीकरण। जैसे भिंडी बाज़ार, मुंबई।
- रेट्रोफिटिंग (शहर सुधार): मौजूदा क्षेत्रों को अधिक उपयोगी और टिकाऊ बनाने के लिये बुनियादी ढाँचे का विकास करना। जैसे स्थानीय क्षेत्र विकास (अहमदाबाद)।
- ग्रीनफील्ड परियोजनाएँ (शहर विस्तार): स्थिरता और स्मार्ट प्रौद्योगिकियों पर ध्यान देने के साथ नए शहरी क्षेत्रों का विकास। जैसे न्यू टाउन, कोलकाता, नया रायपुर, गिफ्ट सिटी (गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी)।
पैन-सिटी समाधान
- ई-गवर्नेंस, अपशिष्ट प्रबंधन, जल प्रबंधन, ऊर्जा प्रबंधन, शहरी गतिशीलता और कौशल विकास जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) समाधानों का अनुप्रयोग किया जाना।
शासन संरचना
- इसकी प्रभावशीलता बढ़ाने के लिये नवीन शासन मॉडल अपनाना।
- कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत एक विशेष प्रयोजन वाहन (Special Purpose Vehicle-SPV) बनाया गया, जिसका नेतृत्व नौकरशाह या बहुराष्ट्रीय निगमों (MNC) के प्रतिनिधियों द्वारा किया गया।
स्मार्ट शहरों का वित्तपोषण
- SCM के लिये 5 वर्षों हेतु केंद्र सरकार द्वारा प्रदत्त लगभग 48,000 करोड़ रुपए (प्रतिवर्ष प्रति शहर औसतन 100 करोड़ रुपए), इनके विकास के क्रम में निर्णायक हैं।
- राज्यों और शहरी स्थानीय निकायों (ULB) को इसमें समान राशि का योगदान करना आवश्यक होता है, जिससे कुल मिलाकर यह राशि लगभग 1 लाख करोड़ रुपए हो जाती है।
अन्य सरकारी योजनाओं के साथ अभिसरण
- SCM के संसाधनों और उद्देश्यों को AMRUT (शहरी रूपांतरण), स्वच्छ भारत मिशन (स्वच्छता), HRIDAY (विरासत शहर विकास), डिजिटल इंडिया, कौशल विकास और सभी के लिये आवास जैसी योजनाओं के साथ जोड़ने से इसकी प्रभावशीलता को बढ़ावा मिलता है।
अभिसरण के लाभ
- SCM के तहत समान लक्ष्यों को प्राप्त करने के क्रम में विभिन्न योजनाओं के मौजूदा फंड एवं बुनियादी ढाँचे का लाभ उठाया जा सकता है।
- अन्य योजनाओं के साथ इसके अभिसरण से सुनिश्चित होता है कि स्मार्ट शहरों में भौतिक बुनियादी ढाँचे के विकास के साथ-साथ सामाजिक बुनियादी ढाँचे (स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति) को भी प्रमुखता दी जाए।
- SCM को इसकी पूरी क्षमता का उपयोग करने के लिये केंद्र और राज्य सरकार के अन्य कार्यक्रमों के साथ रणनीतिक रूप से एकीकृत किया जा सकता है।
स्मार्ट सिटी
स्मार्ट सिटी एक अवधारणा है जो शहरी क्षेत्रों में दक्षता, स्थिरता के साथ-साथ जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिये प्रौद्योगिकी, डेटा एवं नवीन समाधानों के उपयोग को संदर्भित करती है।
स्मार्ट सिटी के मुख्य बुनियादी ढाँचे में निम्नलिखित तत्त्व शामिल हैं
- पर्याप्त जलापूर्ति,
- सुनिश्चित विद्युत आपूर्ति,
- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सहित स्वच्छता,
- कुशल शहरी गतिशीलता एवं सार्वजनिक परिवहन,
- विशेष रूप से गरीबों के लिये किफायती आवास,
- मज़बूत आईटी कनेक्टिविटी एवं डिजिटलीकरण,
- सुशासन, विशेष रूप से ई-गवर्नेंस एवं नागरिक भागीदारी,
- पर्यावरण की धारणीयता,
- नागरिकों, विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों की सुरक्षा
- स्वास्थ्य एवं शिक्षा।
