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केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने एक एडटेक प्लेटफॉर्म (Edtech Platform) के विज्ञापन पर 3 लाख रुपए का ज़ुर्माना लगाया, जिसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 21 के तहत “झूठा और भ्रामक” पाया गया।

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण

  • उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (CPA), 2019 की धारा 10 के तहत स्थापित नियामक निकाय है, यह उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन और अनुचित व्यापार प्रथाओं से संबंधित मामलों को नियंत्रित करता है।
  • यह अधिनियम CCPA को झूठे या भ्रामक विज्ञापनों को रोकने तथा उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अधिकार देता है।
  • यह उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।

CPA अधिनियम की धारा 21

  • CPA, 2019 की धारा 21 CPA को झूठे या भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ निर्देश और दंड जारी करने की शक्ति प्रदान करती है। यह भ्रामक विज्ञापन की परिभाषा, CPA की शक्तियाँ और दंड (2 वर्ष तक की कैद और 10 लाख रुपए तक का ज़ुर्माना) प्रदान करता है।

उपभोक्ताओं को लाभ

  • सूचित उपभोक्ता: CCPA भ्रामक विपणन को रोककर सूचित उपभोक्ता निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।
  • पारदर्शी विज्ञापन: CCPA हस्तक्षेप सत्य विज्ञापन प्रथाओं को बढ़ावा देते हैं
  • विश्वसनीय दावे: CCPA भ्रामक दावों को हतोत्साहित करता है, जिससे उपभोक्ता का विश्वास बढ़ता है।
  • निष्पक्ष प्रतिस्पर्द्धा: यह भ्रामक दावों के बजाय उत्पाद की योग्यता के आधार पर प्रतिस्पर्द्धा सुनिश्चित करता है।

केस स्टडी

छुट्टियों के निलंबन के माध्यम से उपभोक्ता न्यायालयों में लंबित मामलों को कम करना

  • राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (National Consumer Disputes Redressal Commission) और राज्य उपभोक्ता आयोगों ने पारंपरिक ग्रीष्मकालीन अवकाश प्रथाओं (Practices) को निलंबित करके लंबित मामलों के निपटान के लिये काम किया है।

पृष्ठभूमि

  • CCPA की स्थापना (जुलाई 2020) के बाद से 415,104 मामले दर्ज किये गए हैं और 440,971 मामलों का निपटारा किया गया है, जो सकारात्मक रुझान दर्शाता है।
  • हालाँकि दिसंबर 2022 तक उपभोक्ता आयोगों के समक्ष 555,000 मामले लंबित हैं।

बैकलॉग के बारे में

  • वर्ष 2022 में NCDRC ने राज्य उपभोक्ता आयोगों के लिये गर्मियों की छुट्टियों को स्थगित करना शुरू कर दिया।
  • NCDRC ने CCPA के प्रावधानों का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि सभी आयोगों को राज्य सरकार द्वारा निर्धारित अवकाश अनुसूची का पालन करना चाहिये और किसी भी राज्य कार्यालय में गर्मियों की छुट्टी का कोई प्रावधान नहीं है।

प्रभाव और परिणाम

  • वर्ष 2022 में, NCDRC को 3,420 मामले प्राप्त हुए और 4,138 मामलों का समाधान किया गया, जबकि 2021 में 2,449 मामले प्राप्त हुए तथा 2,011 मामलों का समाधान किया गया।
  • वर्ष 2023 में, NCDRC को 5,276 मामले प्राप्त हुए और 6,422 मामलों का समाधान किया गया, जिससे लंबित मामलों में और कमी आई।
  • मई 2024 तक उपभोक्ता आयोगों ने 70,576 मामलों का समाधान किया है, जबकि 69,615 मामले दायर किये गए हैं, जो लंबित मामलों के निपटान में सकारात्मक रुझान दर्शाता है।
  • ई-कोर्ट की शुरुआत ने उपभोक्ता विवाद निवारण प्रक्रिया की दक्षता बढ़ाने में भी योगदान दिया है।

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण के कर्तव्य और दायित्व

  • जागरूक और सूचित उपभोक्ता : भारत में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण भ्रामक विपणन को रोककर उपभोक्ताओं को जागरूक करते हुए सत्य और पहले से ही उस उत्पाद के प्रति सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।
  • पारदर्शी विज्ञापन : केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण के हस्तक्षेप उपभोक्ताओं तक सत्य और पारदर्शी विज्ञापन प्रथाओं को बढ़ावा देने में मदद करता है।
  • विश्वसनीय दावे : भारत में CCPA भ्रामक दावों को रोकता और हतोत्साहित करता है, जिससे उपभोक्ताओं का उस वस्तु या उत्पाद पर विश्वास बढ़ता है।
  • निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा : भारत में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण यह सुनिश्चित करता है कि उत्पाद के संबंध में किसी भी प्रकार की प्रतिस्पर्धा उस उत्पाद की वास्तविक योग्यता पर आधारित हो, न कि भ्रामक दावों या विज्ञापनों के आधार पर निर्भर हो।

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग

  • भारतीय उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (Consumer Protection Act, 2019) के तहत राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Central Consumer Protection Authority, CCPA) की स्थापना की गई है।
  • इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और सुरक्षा करना , उसका प्रोत्साहन करना और प्रवर्तन करना है।
  • CCPA उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए अन्यायपूर्ण व्यापार प्रथाओं और भ्रांतिपूर्ण विज्ञापन के खिलाफ कार्रवाई करता है।
  • यह उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए प्रगतिशील विधानों के प्रवर्तन के माध्यम से काम कर रहा है।

 भारत में CCPA निम्नलिखित कार्यों को करती है

  1. उपभोक्ता हकों के उल्लंघन की जांच करना और अन्यायपूर्ण व्यापार प्रथाओं के खिलाफ कार्रवाई करना।
  2. उपभोक्ता आयोग के सामक्ष शिकायत दर्ज करना।
  3. उपभोक्ता हकों से संबंधित मामलों की समीक्षा करना।
  4. अंतर्राष्ट्रीय उपभोक्ता हकों के अनुशासन की सिफारिश करना।
  5. उपभोक्ता हकों के क्षेत्र में अनुसंधान को प्रोत्साहित करना।
  6. उपभोक्ता हकों के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
  7. उपभोक्ताओं के हित की सुरक्षा करना।
  8. खतरनाक या असुरक्षित वस्त्र या सेवाओं के खिलाफ सुरक्षा सूचनाएँ जारी करना।
  9. केंद्रीय और राज्य सरकार के मंत्रालयों और विभागों को उपभोक्ता कल्याण के उपायों पर सलाह देना।
  10. अन्यायपूर्ण व्यापार प्रथाओं को रोकना।

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