केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री ने भारत मंडपम (नई दिल्ली) में इंटरनेशनल शुगर आर्गेनाईजेशन (ISO) की 64वीं परिषद बैठक का उद्घाटन किया।बैठक में “चीनी और जैव ईंधन-उभरते परिदृश्य” (Sugar and Biofuels-Emerging Vistas) विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों, भारतीय चीनी मिल अधिकारियों, उद्योग संघों और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया।इसमें वैश्विक चीनी सेक्टर के भविष्य, जैव ईंधन, संधारणीयता और किसानों की भूमिका पर चर्चा की गई।भारत विश्व में चीनी का सबसे बड़ा उपभोक्ता और ब्राज़ील के बाद दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।गन्ना विश्व में इथेनॉल उत्पादन (मकई के बाद) के लिये दूसरा सर्व प्रमुख फीडस्टॉक है।
गन्ने का मूल्य कैसे तय होते हैं
- गन्ने का मूल्य केंद्र सरकार और राज्य सरकारें मिलकर तय करती हैं।
केंद्र सरकार: उचित और लाभकारी मूल्य
- केंद्र सरकार FRP की घोषणा करती है जो कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिश पर निर्धारित होती है, जिसे आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) द्वारा घोषित किया जाता है।
- CCEA की अध्यक्षता भारत का प्रधानमंत्री करता है।
- FRP, गन्ना उद्योग के पुनर्गठन पर रंगराजन समिति की रिपोर्ट पर आधारित है।
राज्य सरकार: राज्य परामर्शित मूल्य (SAP)
- SAP की घोषणा प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों की सरकारों द्वारा की जाती है।
- SAP आमतौर पर FRP से अधिक होता है।
- मूल्य की गणना विशेषज्ञों द्वारा की जाती है, जो इनपुट लागत के माध्यम से फसल के संपूर्ण आर्थिक गणना करते हैं और फिर सरकार को सुझाव देते हैं।
चीनी उत्पादन बढ़ाने से लाभ
- चीनी उत्पादन से कई उप-उत्पाद उत्पन्न होते हैं, जैसे कि गुड़, खोई और प्रेस मड, जिनका उपयोग इथेनॉल, कागज़ और जैविक-उर्वरक जैसे अन्य उत्पादों के उत्पादन के लिये किया जा सकता है।
- चीनी मिलें अतिरिक्त गन्ने को इथेनॉल में बदल सकती हैं, जो पेट्रोल के साथ मिश्रित होता है, जो न केवल हरित ईंधन के रूप में काम करता है बल्कि कच्चे तेल के आयात के कारण विदेशी मुद्रा की बचत भी करता है।
- भारत सरकार ने वर्ष 2022 तक पेट्रोल के साथ ईंधन कोटि के इथेनॉल के 10% सम्मिश्रण और वर्ष 2025 तक 20% सम्मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित किया है।
- भारत ने नवंबर, 2022 की लक्षित समय-सीमा से पाँच माह पूर्व देश भर में औसतन 10% सम्मिश्रण का अपना लक्ष्य हासिल कर लिया।
- गन्ने की खेती करने से किसानों को अपनी कृषि गतिविधियों में विविधता लाने और आय बढ़ाने का अवसर मिलता है।
- फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिये गन्ने की खेती को अन्य फसलों जैसे- सब्जियों, फलों और मसालों के साथ एकीकृत किया जा सकता है। इससे मृदा स्वास्थ्य बेहतर हो सकता है, कीट एवं रोगों का दबाव कम हो सकता है, साथ ही फसल की पैदावार में भी सुधार होने की संभावना रहती है।
भारत में गन्ना क्षेत्र की स्थिति
- चीनी उद्योग एक महत्त्वपूर्ण कृषि आधारित उद्योग है जो लगभग 50 मिलियन गन्ना किसानों और चीनी मिलों में सीधे कार्यरत लगभग 5 लाख श्रमिकों की ग्रामीण आजीविका को प्रभावित करता है।
- भारत में कपास के बाद चीनी उद्योग दूसरा सबसे बड़ा कृषि आधारित उद्योग है।
गन्ने की वृद्धि के लिये भौगोलिक स्थितियाँ
- तापमान: गर्म और आर्द्र जलवायु के साथ 21-27 °C के मध्य।
- वर्षा: लगभग 75-100 सेमी.।
- मृदा का प्रकार: गहरी समृद्ध दोमट मृदा।
- शीर्ष गन्ना उत्पादक राज्य: महाराष्ट्र> उत्तर प्रदेश> कर्नाटक।
गन्ना क्षेत्र की स्थिति
- भारत विश्व में चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक एवं उपभोक्ता तथा विश्व के दूसरे सबसे बड़े निर्यातक के रूप में उभरा है।
- इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार, वर्ष 2022 की अक्तूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान भारत का चीनी उत्पादन 3.69% बढ़कर 12.07 मिलियन टन हो गया।
- पिछले साल इसी अवधि में यह 11.64 मिलियन टन था।
- इथेनॉल निर्माण हेतु डायवर्ज़न के बाद कुल चीनी उत्पादन जनवरी 2023 तक बढ़कर 193.5 लाख टन हो गया, जो एक वर्ष पहले की अवधि में 187.1 लाख टन था।
योजना
- चीनी उपक्रमों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की योजना (Scheme for Extending Financial Assistance to Sugar Undertakings- SEFASU)
ISO
- ISO, संयुक्त राष्ट्र (UN) से संबद्ध निकाय है जिसका मुख्यालय लंदन में स्थित है।
- इसके सदस्य देशो की संख्या 85 है जिनका कुल वैश्विक चीनी उत्पादन में 90% योगदान हैं और इसका कार्य प्रमुख चीनी उत्पादक, उपभोक्ता तथा इसका व्यापार करने वाले देशों को एक साथ लाना है।
- ISO के कई सदस्य देश ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस का भी हिस्सा हैं और यह गठबंधन का विस्तार करने तथा जैव ईंधन को बढ़ावा देने के लिये एक अन्य मंच की भूमिका निभा सकता है।
