भारत और रूस के बीच पारस्परिक रसद समझौता जिसे रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स एग्रीमेंट (RELOS) नाम दिया गया है, अब अंतिम रूप के लिये तैयार है। यह भारत और रूस के बीच संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण तथा आपदा राहत प्रयासों सहित सैन्य सहयोग को सुगम बनाएगा।
रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स एग्रीमेंट
- भारत और रूस के बीच रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स एग्रीमेंट (RELOS) एक महत्त्वपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था है जो दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को बढ़ाएगी।
प्रायोजन
- यह समझौता सैन्य रसद सहायता को सुव्यवस्थित करने, भारत और रूस दोनों के लिये संयुक्त अभियानों तथा लंबी दूरी के मिशनों को अधिक कुशल एवं लागत प्रभावी बनाने के लिये अभिकल्पित किया गया है।
महत्त्व
अनवरत संचालन
- यह आवश्यक आपूर्ति (ईंधन, राशन, स्पेयर पार्ट्स) की पुनः पूर्ति की सुविधा प्रदान करेगा, जिससे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में निरंतर, निर्बाध सैन्य उपस्थिति संभव होगी।
- यह सैन्यदल, युद्धपोतों और विमानों के लिये बर्थिंग (घाट पर लगाना) सुविधाएँ प्रदान करेगा।
- यह युद्धकालीन और शांतिकालीन दोनों मिशनों के दौरान क्रियान्वित रहेगा।
रणनीतिक लाभ
- इससे मेज़बान देश के मौजूदा रसद नेटवर्क का बेहतर उपयोग संभव होगा और साथ ही संकटमय स्थितियों पर त्वरित प्रतिक्रिया करने की क्षमता बढ़ेगी।
- इससे दोनों देशों के सैन्य अभियानों को रणनीतिक लाभ मिलने से कुल मिशन व्यय कम हो जाएगा।
सैन्य पहुँच में विस्तार
- यह सामरिक रूप से महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत की समुद्री पहुँच और इसके प्रभुत्त्व को बढ़ाता है।
- समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA) को बढ़ावा देने और साझा रसद सुविधाओं से समुद्री गतिविधियों के संबंध में सूचना का बेहतर आदान-प्रदान हो सकेगा, जिससे दोनों देशों की स्थितिजन्य जागरूकता (किसी स्थिति या वातावरण को पहचानने एवं समझने तथा संभावित खतरों की पहचान करने की क्षमता) में वृद्धि होगी।
क्वाड समझौतों के साथ संतुलन
- RELOS क्वाड देशों के साथ भारत के रसद समझौतों और रूस के गैर-क्वाड रुख को संतुलित करता है।
- यह क्वाड की भागीदारी के बिना हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रूसी प्रभाव को बढ़ाता है।
- यह अमेरिका के प्रभाव तथा रूस और भारत दोनों पर चीन के क्षेत्रीय प्रभाव को संतुलित करता है।
वैज्ञानिक अंतर्संबंध
- आर्कटिक क्षेत्र में भारत की प्राथमिक भागीदारी आर्कटिक समुद्र में हिम के विगलन और भारतीय मानसून प्रणालियों में परिवर्तन के बीच वैज्ञानिक अंतर्संबंधों को समझने पर केंद्रित हैं।
भारत के विभिन्न देशों के साथ लॉजिस्टिक समझौते
भारत तथा अमेरिका
- सामान्य सैन्य सूचना सुरक्षा समझौता (GSOMIA): भारत और अमेरिका के बीच सैन्य खुफिया जानकारी साझा करने के लिये वर्ष 2002 में इस पर हस्ताक्षर किये गए थे।
- लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (LEMOA), 2016: सैन्य लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के पारस्परिक उपयोग की अनुमति देता है।
- बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (BECA), 2020: भारत को अमेरिकी भू-स्थानिक खुफिया डेटा तक पहुँच प्रदान करता है।
- संचार संगतता और सुरक्षा समझौता (COMCASA), 2018: एन्क्रिप्टेड संचार उपकरणों के हस्तांतरण को सक्षम बनाता है।
भारत तथा फ्राँस
- संयुक्त अभ्यास, बंदरगाह यात्राओं और मानवीय प्रयासों के दौरान रसद सहायता की सुविधा प्रदान करता है:
- प्रशांत एवं हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा देता है।
- समुद्री खुफिया जानकारी साझा करने में सक्षम बनाता है।
भारत तथा ऑस्ट्रेलिया
- व्यापक पारस्परिक रसद समर्थन समझौता (MLSA), 2020
- भारत-प्रशांत समुद्री सहयोग के लिये साझा दृष्टिकोण पर ज़ोर दिया गया।
भारत तथा जापान
- सेवाओं के निकट समन्वय (ACSA), 2020 और सशस्त्र बलों के बीच आपूर्ति की अनुमति देता है।
