केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने ई-फ्लो इकोलॉजिकल मॉनिटरिंग सिस्टम लॉन्च किया है, जो नदी की गुणवत्ता की वास्तविक समय पर निगरानी करने की अनुमति देता है। इस प्रणाली का उद्देश्य गंगा एवं यमुना सहित प्रमुख भारतीय नदियों में जल संसाधनों तथा एनवायरनमेंट फ्लो के प्रबंधन को उन्नत बनाना है।
एनवायरनमेंट फ्लो
- एनवायरनमेंट फ्लो (ई-फ्लो) का आशय जलीय पारिस्थितिकी प्रणालियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने तथा इन पारिस्थितिकी प्रणालियों पर निर्भर जीवों का समर्थन करने हेतु निश्चित समय पर आवश्यक जल प्रवाह की मात्रा एवं गुणवत्ता की उपलब्धता से है।
- नदियों, झीलों एवं आर्द्रभूमि के पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने हेतु ई-फ्लो आवश्यक है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि इनसे महत्त्वपूर्ण पारिस्थितिकी सेवाएँ मिलती रहें।
एनवायरनमेंट फ्लो के प्रमुख पहलू
- मात्रा: पारिस्थितिकी तंत्र में पारिस्थितिकी प्रक्रियाओं तथा प्रजातियों हेतु आवश्यक जल की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित होना।
- समय: प्राकृतिक जल विज्ञान चक्र के अनुसार मौसमी और अंतर-वार्षिक उतार-चढ़ाव सहित जल प्रवाह में प्राकृतिक विविधताओं को संरक्षित करना।
- गुणवत्ता: जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य हेतु उपयुक्त जल गुणवत्ता मानकों (जिसमें घुलित ऑक्सीजन, तापमान तथा पोषक तत्त्वों की सांद्रता का उचित स्तर शामिल है) को बनाए रखना।
- आवृत्ति: यह सुनिश्चित करना कि विशिष्ट प्रवाह की स्थितियाँ (जैसे- उच्च प्रवाह, निम्न प्रवाह और बाढ़ की घटनाएँ) ऐसी हों जिससे जलीय प्रजातियों के जीवन चक्र का समर्थन किया जा सके।
ई-फ्लो पारिस्थितिकी निगरानी प्रणाली की मुख्य विशेषताएँ
- ई-फ्लो निगरानी प्रणाली को जल शक्ति मंत्रालय के एक प्रभाग, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा विकसित किया गया था।
- यह प्रणाली संपूर्ण वर्ष गंगा के विभिन्न हिस्सों में न्यूनतम ई-फ्लो बनाए रखने के लिये केंद्र द्वारा वर्ष 2018 के जनादेश का अनुसरण करती है।
- यह जनादेश पर्यावरण समूहों की चिंताओं का जवाब था, जो बाँधों के कारण नदी की पारिस्थितिकी और प्रवाह पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव के संदर्भ में था।
मुख्य विशेषताएँ
- वास्तविक समय (Real-Time) पर निगरानी: यह प्रणाली गंगा, यमुना और उनकी सहायक नदियों में जल गुणवत्ता के निरंतर विश्लेषण की अनुमति देती है।
- केंद्रीकृत निरीक्षण: यह नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत गतिविधियों की निगरानी करने में सक्षम बनाता है, जो विशेष रूप से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के प्रदर्शन की निगरानी करता है।
- व्यापक डेटा विश्लेषण: गंगा की मुख्यधारा के साथ 11 परियोजनाओं में इन-फ्लो, आउट-फ्लो और अनिवार्य ई-फ्लो को ट्रैक करने के लिये केंद्रीय जल आयोग तिमाही रिपोर्ट का उपयोग करता है।
नमामि गंगे कार्यक्रम
- कार्यक्रम’ के रूप में अनुमोदित किया गया था, ताकि प्रदूषण के प्रभावी उन्मूलन और राष्ट्रीय नदी गंगा के संरक्षण एवं कायाकल्प के दोहरे उद्देश्यों को पूरा किया जा सके।
कार्यक्रम के मुख्य स्तंभ हैं
- सीवेज ट्रीटमेंट अवसंरचना
- रिवर फ्रंट डेवलपमेंट
- नदी-सतह की सफाई
- जैवविविधता संरक्षण
- वनीकरण
- जन जागरण
- औद्योगिक प्रवाह निगरानी
- गंगा ग्राम
