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वर्ष 2018 से अब तक छह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSB) ने विलफुल डिफॉल्टर को अन्य देशों में जाने से रोकने के लिये 1,071 लुक-आउट सर्कुलर (LOC) जारी किये हैं।जानबूझकर ऋण न चुकाने वाले उधारकर्त्ता वे होते हैं जो जानबूझकर अपना ऋण नहीं चुकाते हैं, भले ही वे ऐसा करने में सक्षम हों।

लुक-आउट सर्कुलर

  • यह नोटिस पुलिस, जाँच एजेंसी या यहाँ तक ​​कि बैंक द्वारा वांछित किसी भी व्यक्ति को निर्दिष्ट भूमि, वायु और समुद्री बंदरगाहों के माध्यम से देश छोड़ने या देश में प्रवेश करने से रोकने के लिये है।
  • गृह मंत्रालय के अधीन आव्रजन ब्यूरो ऐसे व्यक्तियों को देश में प्रवेश करने या देश छोड़ने से रोकने के लिये ज़िम्मेदार है, यदि उनके खिलाफ कोई पूर्व अधिसूचना हो।
  • पूरे देश में कुल 112 आव्रजन जाँच चौकियाँ स्थित हैं।

LOC कौन जारी कर सकता है

बड़ी संख्या में एजेंसियाँ ​​लुकआउट सर्कुलर जारी कर सकती हैं;

  • केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (Central Bureau of Investigation- CBI)
  • प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate- ED)
  • राजस्व खुफिया निदेशालय (Directorate of Revenue Intelligence- DRI)
  • आयकर विभाग
  • राज्य पुलिस और खुफिया एजेंसियाँ।

LOC जारी करने वाला अधिकारी ज़िला मजिस्ट्रेट या पुलिस अधीक्षक या केंद्र सरकार में उप सचिव के पद से निम्न पद वाला नहीं होना चाहिये।

संशोधन और वैधता

  • LOC को केवल प्रवर्तक के अनुरोध पर ही संशोधित किया हटाया या वापस लिया जा सकता है।
  • एल.ओ.सी. अधिकतम 12 माह तक वैध रहेगी और यदि एजेंसी की ओर से कोई अन्य अनुरोध नहीं आता है, तो इसका स्वतः नवीनीकरण नहीं होगा।
  • आव्रजन ब्यूरो, आव्रजन जाँच चौकियों (Immigration Check Posts- ICP) पर LOC वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा उन्हें बनाए रखने के लिये ज़िम्मेदार है, जैसा कि मूल एजेंसी द्वारा निर्देश दिया जाता है।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को ऋण-पत्र जारी करने की शक्ति

  • इससे पहले, वर्ष 2018 से बैंकों को ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ भी LOC जारी करने का अधिकार दिया गया था जो देश के आर्थिक हितों को संभावित रूप से हानि पहुँचा सकते थे।
  • हालाँकि, हाल ही में बॉम्बे उच्च न्यायालय ने निर्णय सुनाया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कथित ऋण चूककर्त्ताओं के खिलाफ LOC जारी नहीं कर सकते हैं, क्योंकि न्यायालय ने इसे किसी कानून या विधान के अभाव में मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना है।
  • यह निर्णय 2018 के सरकारी कार्यालय ज्ञापन को पलट देता है, जिसने बैंकों को LOC जारी करने का अधिकार दिया है।

विलफुल डिफॉल्टर्स

  • भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India- RBI) जानबूझकर चूक करने वालों को ऐसे उधारकर्त्ता के रूप में परिभाषित करता है जो निम्नलिखित मानदंडों में से एक या अधिक को पूरा करते हैं:
  • पर्याप्त धनराशि होने के बावजूद जानबूझ कर बकाया राशि का भुगतान न करना।
  • ऋण राशि को उस उद्देश्य के अलावा अन्य कार्यों में लगाना जिसके लिये उसे उधार लिया गया था।
  • ऋण राशि को इस प्रकार हड़पना (Syphoning) कि वह पुनर्भुगतान के लिये उपलब्ध न हो।
  • न्यूनतम सीमा: किसी उधारकर्त्ता को जानबूझकर ऋण न चुकाने वाला घोषित करने के लिये न्यूनतम ऋण राशि 25 लाख रुपए या उससे अधिक निर्धारित है।
  • बड़े डिफॉल्टर से तात्पर्य ऐसे उधारकर्त्ता से है, जिसका बकाया शेष 1 करोड़ रुपए या उससे अधिक है तथा जिसके खाते को संदिग्ध या घाटे वाली श्रेणी में रखा गया है।

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