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वर्ष 2003 में कोलंबो प्रक्रिया की स्थापना के बाद, भारत हाल ही में पहली बार इस क्षेत्रीय समूह का अध्यक्ष बना है।भारत वर्ष 2024-26 की अवधि तक इस समूह का नेतृत्व करेगा।

कोलंबो (Colombo) प्रक्रिया

  • कोलंबो प्रक्रिया में 12 एशियाई देश शामिल हैं, यह एक क्षेत्रीय परामर्श मंच के रूप में कार्य करता है। इसका उद्देश्य दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के उन देशों के लिये विदेशी रोज़गार से संबंधित सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना है जो प्रवासी श्रमिकों को विदेश भेजते हैं।
  • इसके 12 सदस्य देशों में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, कंबोडिया, चीन, भारत, इंडोनेशिया, नेपाल, पाकिस्तान, फिलीपींस, श्रीलंका, थाईलैंड और वियतनाम शामिल हैं।
  • संस्थापक राज्यों में बांग्लादेश, चीन, भारत, इंडोनेशिया, नेपाल, पाकिस्तान, फिलीपींस, श्रीलंका, थाईलैंड और वियतनाम शामिल हैं।
  • अतीत में इसकी अध्यक्षता अफगानिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, फिलीपींस, इंडोनेशिया और बांग्लादेश ने की है।
  • कोलंबो प्रक्रिया के अंतर्गत निर्णय सर्वसम्मति से लिये जाते हैं और बाध्यकारी नहीं होते।

उद्देश्य

  • अनुभव, सीखे गए सबक और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना।
  • विदेशी श्रमिकों के सामने आने वाले मुद्दों पर परामर्श करना और व्यावहारिक समाधान सुझाना।
  • संगठित विदेशी रोज़गार से विकास लाभों को अधिकतम करना।
  • मंत्रिस्तरीय अनुशंसाओं के कार्यान्वयन की समीक्षा और निगरानी करना।

सचिवालय: अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (International Organisation for Migration- IOM) कोलंबो प्रक्रिया को तकनीकी और प्रशासनिक सहायता प्रदान करता है।श्रीलंका स्थित कोलंबो प्रक्रिया तकनीकी सहायता इकाई (Colombo Process Technical Support Unit- CPTSU) कोलंबो प्रक्रिया को उसके विषयगत क्षेत्रों में तकनीकी सहायता प्रदान करती है।

पाँच विषयगत प्राथमिकता वाले क्षेत्र

  1. कौशल और योग्यता मान्यता प्रक्रिया
  2. नैतिक भर्ती प्रथाओं को बढ़ावा देना
  3. प्रस्थान-पूर्व अभिविन्यास और सशक्तीकरण
  4. प्रेषण के किफायती, तेज़ और सुरक्षित हस्तांतरण को बढ़ावा देना
  5. श्रम बाज़ार विश्लेषण

उपलब्धियाँ

  • यूरोप में श्रमिकों की नियुक्ति और नैतिक भर्ती पर एशिया में रोज़गार एजेंसियों हेतु एक क्षेत्रीय कार्यशाला मनीला (2006) में आयोजित की गई थी।
  • खाड़ी सहयोग परिषद (Gulf Cooperation Council- GCC) के संविदा श्रम गंतव्य देशों में से एक में प्रवासी श्रमिक संसाधन केंद्र (Overseas Workers Resource Centre- OWRC) स्थापित करने हेतु व्यवहार्यता अध्ययन पूर्ण हो गया है।
  • वर्ष 2008 में ब्रुसेल्स (Brussels) में सर्वप्रथम “श्रम प्रवास पर एशिया-यूरोपीय संघ परामर्श” का आयोजन किया गया था, जिसमें कोलंबो प्रक्रिया देशों के अतिरिक्त 16 यूरोपीय संघ सदस्य देशों ने भाग लिया था।

अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन

  • यह संयुक्त राष्ट्र प्रणाली का एक हिस्सा है, जो 1951 से सभी के लाभ के लिये मानवीय और व्यवस्थित प्रवासन को बढ़ावा देने वाला अग्रणी अंतर-सरकारी संगठन है। इसके 175 सदस्य देश हैं और वर्तमान में 171 देशों में इसकी उपस्थिति है।

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