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हाल ही में भारत के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2022-23 की विस्तृत रिपोर्ट जारी की गई है। घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण के इस रिपोर्ट ने भारत के विभिन्न राज्यों के ग्रामीण और शहरी परिवारों की व्यय आदतों के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारी प्रदान की है।

घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण

  • भारत में घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण का आयोजन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (National Statistical Office- NSO) द्वारा हर 5 वर्ष में किया जाता है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य भारत के विभिन्न राज्यों के घरों द्वारा वस्तुओं और सेवाओं के उपभोग के बारे में जानकारी एकत्र करना होता है।
  • घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण में संकलित आँकड़ों का उपयोग सकल घरेलू उत्पाद (GDP), गरीबी दर, और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index- CPI) जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतकों को निर्धारित करने के लिए भी किया जाता है।
  • वर्तमान में जारी यह रिपोर्ट औसत मासिक प्रति व्यक्ति उपभोक्ता व्यय (MPCE) की गणना 2011-12 के मूल्यों पर आधारित है।
  • राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा किए गए इस सर्वेक्षण में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कुछ दुर्गम गांवों / स्थानों को छोड़कर पूरे भारतीय संघ को शामिल किया गया है।
  • सन 2017-18 में आयोजित अंतिम घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण के निष्कर्ष सरकार द्वारा “डेटा गुणवत्ता” के मुद्दों का हवाला देकर जारी नहीं किया गया था।

घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण की मुख्य बातें

खाद्य व्यय प्राथमिकताएँ

  • पेय पदार्थ, जलपान और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ : यह श्रेणी कई राज्यों में खाद्य व्यय का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा थी, विशेष रूप से तमिलनाडु में, जहां ग्रामीण (28.4%) और शहरी (33.7%) दोनों क्षेत्रों में सबसे अधिक व्यय प्रतिशत था।
  • दूध और दूध उत्पाद : हरियाणा (ग्रामीण 41.7%, शहरी 33.1%) और राजस्थान (शहरी 33.2%) जैसे उत्तरी राज्यों के ग्रामीण और शहरी परिवारों में प्रमुख रूप से पसंद किया जाता है ।
  • अंडा, मछली और मांस : केरल के परिवारों ने इस श्रेणी में सबसे अधिक व्यय किया, ग्रामीण (23.5%) और शहरी (19.8%) दोनों ही स्थितियों में।

समग्र खाद्य बनाम गैर-खाद्य व्यय

  • खाद्य व्यय: ग्रामीण भारत में खाद्य , कुल घरेलू उपभोग व्यय का लगभग 46% है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह लगभग 39% है।
  • गैर-खाद्य व्यय: गैर-खाद्य वस्तुओं पर उच्च व्यय की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है , गैर-खाद्य वस्तुओं पर ग्रामीण व्यय 1999 में 40.6% से बढ़कर 2022-23 में 53.62% हो गया है और इसी अवधि में शहरी व्यय 51.94% से बढ़कर 60.83% हो गया है।

प्रमुख गैर-खाद्य व्यय श्रेणियाँ

  • परिवहन : ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में गैर-खाद्य व्यय में शीर्ष स्थान पर रहा , केरल में इसका प्रतिशत सबसे अधिक रहा।
  • चिकित्सा व्यय : ग्रामीण क्षेत्रों के लिए केरल, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश में तथा शहरी क्षेत्रों के लिए पश्चिम बंगाल, केरल और पंजाब में विशेष रूप से अधिक है।
  • टिकाऊ वस्तुएं : टिकाऊ वस्तुओं पर सबसे अधिक व्यय केरल में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में देखा गया।
  • ईंधन और प्रकाश : पश्चिम बंगाल और ओडिशा ने क्रमशः ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण व्यय दर्शाया।

क्षेत्रीय विविधताएँ

  • विभिन्न राज्यों ने विशिष्ट खाद्य और गैर-खाद्य वस्तुओं पर खर्च के लिए अलग-अलग प्राथमिकताएं दिखाईं, जो सांस्कृतिक और क्षेत्रीय आर्थिक अंतर को दर्शाती हैं।

उपभोग व्यय में वृद्धि

  • सर्वेक्षण से पता चलता है कि पिछले दशक में उपभोग व्यय में पर्याप्त वृद्धि हुई है। 2011-12 से 2022-23 तक ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति मासिक खपत में 164% की वृद्धि हुई, जबकि शहरी क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति मासिक खपत में 146% की वृद्धि हुई।
  • भारत में शहरी क्षेत्र की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति मासिक खपत में अधिक वृद्धि देखी गई है।
  • शहरी और ग्रामीण एमपीसीई के बीच अंतर में पिछले कुछ वर्षों में कमी देखी गई है , जो 2009-10 में 90 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 75 प्रतिशत हो गया है।

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