Wed. Apr 1st, 2026

भारत में नागरिकों और राजनीतिक दलों के एक व्यापक वर्ग के बीच इस बात पर आम सहमति बन रही है कि वर्तमान फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट चुनाव प्रणाली को एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में आनुपातिक प्रतिनिधित्व चुनाव प्रणाली से प्रतिस्थापित किया जाना चाहिये।

फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट चुनाव प्रणाली

  • यह एक चुनावी प्रणाली है जिसमें मतदाता एक ही उम्मीदवार को मत देते हैं और सबसे अधिक मत पाने वाला उम्मीदवार चुनाव जीत जाता है।
  • इसे साधारण बहुमत प्रणाली या बहुलता प्रणाली के नाम से भी जाना जाता है।
  • यह सबसे सरल और सबसे पुरानी चुनावी प्रणालियों में से एक है, जिसका उपयोग यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, कनाडा तथा भारत जैसे देशों में किया जाता है।

विशेषताएँ

  • मतदाताओं को विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा नामांकित या स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों की सूची प्रस्तुत की जाती है।
  • मतदाता अपने मतपत्र या इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर निशान लगाकर एक उम्मीदवार का चयन करते हैं।
  • किसी निर्वाचन क्षेत्र में सबसे अधिक मत पाने वाले उम्मीदवार को विजेता घोषित किया जाता है।
  • विजेता को बहुमत (50% से अधिक) प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि केवल बहुलता (सबसे अधिक संख्या) मत प्राप्त करने की आवश्यकता है।
  • इस प्रणाली के कारण संसद जैसे विधानसभा के सदस्यों के चयन में अक्सर असंगत परिणाम सामने आते हैं, क्योंकि राजनीतिक दलों को उनके समग्र मत के अनुपात के अनुरूप प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाता है।

लाभ

  • सरलता: यह एक सरल प्रणाली है जिसे मतदाता आसानी से समझ सकते हैं और अधिकारी इसे सरलतापूर्वक लागू भी कर सकते हैं। यह इसे अधिक लागत-प्रभावी और कुशल बनाता है।
  • स्पष्ट एवं निर्णायक विजेता: यह एक निश्चित विजेता के साथ परिणाम प्रदान करता है, जो चुनावी प्रणाली में स्थिरता और विश्वसनीयता में योगदान दे सकता है।
  • जवाबदेही: चुनावों में उम्मीदवार सीधे तौर पर अपने मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली की तुलना में बेहतर जवाबदेही सुनिश्चित होती है, जहाँ उम्मीदवार उतने प्रसिद्ध नहीं होते।
  • उम्मीदवार चयन: यह मतदाताओं को पार्टियों और विशिष्ट उम्मीदवारों के बीच चयन करने की अनुमति देता है, जबकि PR प्रणाली में मतदाताओं को एक पार्टी का चयन करना होता है तथा प्रतिनिधियों का चुनाव पार्टी सूची के आधार पर किया जाता है।
  • गठबंधन निर्माण: यह विभिन्न सामाजिक समूहों को स्थानीय स्तर पर एकजुट होने के लिये प्रोत्साहित करता है, व्यापक एकता को बढ़ावा देता है और कई समुदाय-आधारित दलों में विखंडन को रोकता है।

आनुपातिक प्रतिनिधित्व

  • यह एक चुनावी प्रणाली है जिसमें राजनीतिक दलों को चुनावों में प्राप्त मतों के अनुपात में विधायिका में प्रतिनिधित्व (सीटों की संख्या) मिलता है।

विशेषताएँ

  • यह मत के हिस्से के आधार पर राजनीतिक दलों का निष्पक्ष प्रतिनिधित्व करता है।
  • यह सुनिश्चित करता है कि संसद या अन्य निर्वाचित निकायों में सीटें आवंटित करने के लिये प्रत्येक मत महत्त्वपूर्ण हो।

प्रकार

एकल हस्तांतरणीय मत (Single Transferable Vote- STV):

  • यह मतदाता को अपने उम्मीदवार को वरीयता क्रम में स्थान देने की अनुमति देता है, अर्थात् बैकअप संदर्भ प्रदान करके और मतदान करके।
  • एकल संक्रमणीय मत (STV) द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व (PR) मतदाताओं को पार्टी के सबसे पसंदीदा उम्मीदवार को चुनने और स्वतंत्र उम्मीदवारों को मत देने में सक्षम बनाता है।
  • भारत के राष्ट्रपति का चुनाव STV के साथ PR प्रणाली के माध्यम से किया जाता है, जहाँ राष्ट्रपति के चुनाव के लिये गुप्त मतदान प्रणाली का उपयोग किया जाता है।
  • निर्वाचक मंडल, जिसमें राज्यों की विधानसभाएँ, राज्य परिषद तथा राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य शामिल होते हैं, STV का उपयोग करते हुए PR प्रणाली के माध्यम से भारतीय राष्ट्रपति का चुनाव करता है।

पार्टी-सूची PR

  • यहाँ मतदाता पार्टी को मत देते हैं (व्यक्तिगत उम्मीदवार को नहीं) और फिर पार्टियों को उनके मत शेयर के अनुपात में सीटें मिलती हैं।
  • आमतौर पर किसी पार्टी के लिये सीट पाने की न्यूनतम सीमा 3-5% मत शेयर होती है।

मिश्रित सदस्य आनुपातिक प्रतिनिधित्व

  • यह एक ऐसी प्रणाली है जिसका उद्देश्य किसी देश की राजनीतिक प्रणाली में स्थिरता और आनुपातिक प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन प्राप्त करना है।
  • इस प्रणाली के तहत प्रत्येक प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र से फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (FPTP) प्रणाली के माध्यम से एक उम्मीदवार चुना जाता है। इन प्रतिनिधियों के अलावा देश भर में विभिन्न पार्टियों को उनके मत प्रतिशत के आधार पर अतिरिक्त सीटें भी आवंटित की जाती हैं।
  • इससे सरकार में अधिक विविध प्रतिनिधित्व संभव हो सकेगा, साथ ही विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों से व्यक्तिगत प्रतिनिधियों की स्थिरता भी बनी रहेगी।
  • न्यूज़ीलैंड, दक्षिण कोरिया और जर्मनी ऐसे देशों के उदाहरण हैं जहाँ MMP क्रियाशील है।

लाभ

यह सुनिश्चित करना कि प्रत्येक मत महत्त्वपूर्ण हो

  • PR में हर मत संसद में सीटों के आवंटन के लिये गिना जाता है। इसका मतलब है कि मतदाताओं में लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी की भावना अधिक होती है।

विविध एवं प्रतिनिधि सरकार PR प्रणाली के अंतर्गत छोटे दलों और अल्पसंख्यक समूहों को प्रतिनिधित्व मिलने की अधिक संभावना होती है, जिससे संसद में

Login

error: Content is protected !!