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भारत के बंदरगाह विकास कार्यक्रम को महत्वपूर्ण बढ़ावा देते हुए, विश्व बैंक और एसएंडपी ग्लोबल मार्केटिंग इंटेलिजेंस द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट कंटेनर पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स (सीपीपीआई), 2023 के नवीनतम संस्करण में भारत के नौ बंदरगाहों ने वैश्विक शीर्ष 100 में जगह बनाई है। इस उपलब्धि का श्रेय  सागरमाला कार्यक्रम को दिया गया है, जिसने बंदरगाहों के आधुनिकीकरण एवं उनकी दक्षता में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया है।

CPPI, 2023 की मुख्य विशेषताएँ

सूचकांक के बारे में

  • यह विश्व बैंक और S&P ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस द्वारा विकसित एक वैश्विक सूचकांक है। यह दुनिया भर के कंटेनर बंदरगाहों के प्रदर्शन को मापता है और साथ ही उनकी तुलना करता है।
  • यह सूचकांक 405 वैश्विक कंटेनर बंदरगाहों को दक्षता के आधार पर रैंकिंग करता है, तथा कंटेनर जहाज़ों के बंदरगाह पर ठहरने की अवधि पर ध्यान केंद्रित करता है।
  • इसका प्राथमिक उद्देश्य बंदरगाहों से लेकर शिपिंग लाइनों, राष्ट्रीय सरकारों के साथ-साथ उपभोक्ताओं तक वैश्विक व्यापार प्रणाली और आपूर्ति शृंखलाओं में विभिन्न हितधारकों के लाभ वृद्धि क्षेत्रों की पहचान करना है।

ग्लोबल रैंकिंग

  • CPPI, 2023 रैंकिंग में चीन का यांगशान बंदरगाह पहले स्थान पर है, उसके बाद ओमान का सलालाह बंदरगाह है। कार्टाजेना बंदरगाह तीसरे तथा टैंजियर-मेडिटेरेनियन बंदरगाह चौथे स्थान पर है।

भारत की स्थिति

  • विशाखापत्तनम बंदरगाह वर्ष 2022 में 115वें स्थान से वर्ष 2023 की रैंकिंग में 19वें स्थान पर पहुँच गया है और साथ ही यह वैश्विक स्तर पर शीर्ष 20 में पहुँचने वाला पहला भारतीय बंदरगाह बन गया है।
  • मुंद्रा पोर्ट/बंदरगाह ने भी अपनी स्थिति में सुधार किया है, जो पिछले वर्ष के 48वें स्थान से बढ़कर वर्तमान रैंकिंग में 27वें स्थान पर पहुँच गया है।
  • शीर्ष 100 में स्थान प्राप्त करने वाले अन्य सात भारतीय बंदरगाह हैं – पीपावाव (41), कामराज (47), कोचीन (63), हजीरा (68), कृष्णापट्टनम (71), चेन्नई (80) और जवाहरलाल नेहरू (96)।

सागरमाला कार्यक्रम

  • वर्ष 2015 में शुरू किया गया सागरमाला कार्यक्रम, बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है, जो देश के समुद्री क्षेत्र को बदलने के लिये सरकार द्वारा एक दूरदर्शी दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है।
  • भारत की व्यापक तटरेखा, नौगम्य जलमार्ग एवं रणनीतिक समुद्री व्यापार मार्गों के साथ, सागरमाला का उद्देश्य बंदरगाह-आधारित विकास तथा तटीय समुदाय के उत्थान के लिये इन संसाधनों की अप्रयुक्त क्षमता का उपयोग करना है।
  • यह घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय व्यापार दोनों के लिये रसद लागत को कम करके के साथ इसके प्रदर्शन को बढ़ाने का भी प्रयास करता है। तटीय एवं जलमार्ग परिवहन का लाभ उठाकर, कार्यक्रम का उद्देश्य व्यापक बुनियादी ढांचे के निवेश की आवश्यकता को कम करना है,
  • इस प्रकार रसद को अधिक कुशल बनाना और साथ ही भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्द्धात्मकता में सुधार करना है।

भारत के बंदरगाह पारिस्थितिकी तंत्र का परिदृश्य

  • पोत परिवहन मंत्रालय के अनुसार, भारत का लगभग 95% व्यापार मात्रा के हिसाब से और 70% व्यापार मूल्य के हिसाब से होता है, जिसमें समुद्री परिवहन माध्यम होता है।
  • नवंबर, 2020 में प्रधानमंत्री ने जहाज़रानी मंत्रालय का नाम बदलकर पत्‍तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय कर दिया।
  • भारत सरकार बंदरगाह क्षेत्र को समर्थन देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसने बंदरगाह और बंदरगाह निर्माण एवं रखरखाव परियोजनाओं के लिये स्वचालित मार्ग के तहत 100% तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दी है।

प्रमुख पत्तन बनाम लघु पत्तन

  • भारत में बंदरगाहों को भारतीय पत्तन अधिनियम, 1908 के तहत परिभाषित केंद्र एवं राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र के अनुसार प्रमुख और लघु बंदरगाहों के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • सभी 13 प्रमुख बंदरगाहों को प्रमुख बंदरगाह ट्रस्ट अधिनियम, 1963 के तहत शासित किया जाता है, जबकि उनका स्वामित्व और प्रबंधन केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है।
  • सभी लघु बंदरगाहों को भारतीय पत्तन अधिनियम, 1908 के तहत शासित किया जाता है और उनका स्वामित्व और प्रबंधन राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है।
  • सागरमाला के लिये राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के तहत, देश में छह नवीन मेगा बंदरगाह विकसित किये जाएँगे।

संबंधित आँकड़े

  • भारत 7,516.6 किलोमीटर की तटरेखा के साथ विश्व का सोलहवाँ सबसे बड़ा समुद्री देश (Maritime Country) है। भारतीय पत्तन एवं पोत उद्योग देश के व्यापार और वाणिज्य में वृद्धि को बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • भारत में बंदरगाह क्षेत्र बाहरी व्यापार में उच्च वृद्धि से प्रेरित है।
  • वित्त वर्ष 23 में भारत के प्रमुख बंदरगाहों के द्वारा 783.50 मिलियन टन कार्गो यातायात हुआ, जिसका तात्पर्य वित्त वर्ष 16-23 में 3.26% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से है।
  • वित्त वर्ष 24 (अप्रैल-जनवरी) में प्रमुख पत्तनों द्वारा किया गया कार्गो यातायात 677.22 मिलियन टन था।
  • घरेलू जलमार्ग माल परिवहन का एक लागत प्रभावी और पर्यावरण की दृष्टि से सतत् तरीका है।
  • सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 23 अंतर्देशीय जलमार्गों को प्रारंभ करना है।

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