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यूनिसेफ (UNICEF) ने ‘चाइल्ड न्यूट्रीशन रिपोर्ट 2024’ जारी की, जिसका शीर्षक है ‘चाइल्ड फूड पाॅवर्टी: न्यूट्रीशन डिप्रीवेशन इन अर्ली चाइल्डहुड”।

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

  • वैश्विक स्तर पर 5 वर्ष से कम आयु के लगभग 181 मिलियन बच्चे (इस आयु वर्ग के चार बच्चों में से एक) गंभीर फूड पावर्टी/खाद्य अभाव का सामना कर रहे हैं।
  • UNICEF के वैश्विक डेटाबेस, 2023 के अनुसार, भारत के 40% बच्चे गंभीर खाद्य अभाव का सामना कर रहे हैं।
  • गंभीर चाइल्ड फूड पावर्टी के समाधान की दिशा में प्रगति धीमी बनी हुई है लेकिन कुछ क्षेत्र और देश इस दिशा में सही प्रगति का संकेत दे रहे हैं।
  • चाइल्ड फूड पावर्टी की गंभीरता से गरीब एवं संपन्न, दोनों ही परिवारों के बच्चे प्रभावित होते हैं, इससे प्रदर्शित होता है कि घरेलू आय इस मुद्दे के समाधान का एकमात्र कारक नहीं है।
  • गंभीर फूड पाॅवर्टी का सामना कर रहे बच्चों को पोषक तत्त्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ न मिलने के कारण अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों का सेवन करना पड़ता है।
  • वैश्विक खाद्य एवं पोषण संकट के साथ ही स्थानीय संघर्ष एवं जलवायु असंतुलन से यह स्थिति और विकराल (खासकर कमज़ोर देशों में) हो जाती है।
  • कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और सोमालिया जैसे क्षेत्रों के सुभेद्य/कमज़ोर समुदायों में 80% से अधिक अभिभावकों से यह पता चला है कि उनके बच्चे धन या अन्य संसाधनों की कमी के कारण पूरे दिन के लिये पर्याप्त भोजन उपभोग का नहीं कर पा रहे हैं।
  • चाइल्ड फूड पाॅवर्टी, बाल कुपोषण का प्रमुख कारण है। चाइल्ड स्टंटिंग के उच्च प्रसार वाले देशों में गंभीर चाइल्ड फूड पाॅवर्टी का प्रसार तीन गुना अधिक है।

चाइल्ड फूड पावर्टी:

  • UNICEF के अनुसार चाइल्ड फूड पाॅवर्टी का आशय प्रारंभिक बाल्यावस्था में (5 वर्ष से कम उम्र) पौष्टिक तथा विविध आहार तक पहुँच न होने के साथ उसका उपभोग करने में असमर्थता है।

चाइल्ड फूड पावर्टी या बाल कुपोषण शब्द के तहत दो विशिष्ट समूह शामिल हैं:

इसमें पहला समूह है ‘बाल अल्पपोषण- जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं-

  • चाइल्ड स्टंटिंग Child Stunting (आयु के अनुसार कम ऊँचाई),
  • चाइल्ड वेस्टिंग Child Wasting (ऊँचाई के अनुसार कम वज़न),
  • अल्प-वज़न (आयु के अनुसार कम वज़न) और
  • पोषक तत्त्वों का अभाव (प्रमुख विटामिन एवं खनिजों का अभाव)

इसमें दूसरा समूह है बच्चों का अधिक वज़न, मोटापा और आहार संबंधी आदतें।

  • बाल्यावस्था में अधिक वज़न तब होता है जब बच्चों द्वारा भोजन और पेय पदार्थों से ग्रहण की जाने वाली कैलोरी, उनकी ऊर्जा आवश्यकताओं से अधिक हो जाती है।

छिपी हुई भूख (Hidden Hunger), कुपोषण का एक रूप है जिसे सूक्ष्मपोषकों की कमी के रूप में भी जाना जाता है। यह स्थिति व्यक्तियों को अपने आहार में आवश्यक विटामिन और खनिजों की पर्याप्त मात्रा नहीं मिलने पर होती है।

चाइल्ड फूड पावर्टी के प्रमुख कारण

अनुपयुक्त खाद्य वातावरण

  • ग्रामीण क्षेत्रों में व्यवधान: प्रतिकूल मौसम, विषम जलवायु, असुरक्षा अथवा खराब बुनियादी ढाँचा ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में खाद्य के उत्पादन और उसकी पहुँच को बाधित करते हैं।
  • उदाहरण: सोमालिया जैसे अफ्रीकी देशों में सूखे और बाढ़ से खाद्य उत्पादन प्रभावित हुआ जिससे उन क्षेत्रों में बच्चों के लिये विविध व स्वस्थ खाद्य पदार्थों तक पहुँच सीमित हो गई।
  • अस्वास्थ्यकर विकल्पों की अधिकता: विश्व स्तर पर, शहरी क्षेत्रों में स्थित दुकानों और बाज़ारों में अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ (कम पोषक तत्त्व, अस्वास्थ्यकर वसा, उच्च शुगर और नमक की बहुलता वाले) उपलब्ध होते हैं जिनका अत्यधिक विज्ञापन किया जाता है और प्रायः ये अन्य स्वास्थ्यवर्द्धक विकल्पों की तुलना में सस्ते होते हैं।

प्रारंभिक बाल्यावस्था के दौरान आहार की अनुपयुक्त पद्धतियाँ

  • पीढ़ीगत ज्ञान अंतराल: बच्चों को आहार देने के तरीकों के बारे में गलत जानकारी और उचित मार्गदर्शन की कमी पीढ़ियों से चली आ रही है, जिसके कारण छोटे बच्चों के लिये अपर्याप्त आहार की समस्या बनी हुई है।
  • लैंगिक असमानता: कुछ देशों में ऐसे भेदभावपूर्ण लैंगिक मानदंड विद्यमान हैं जो महिलाओं की सूचना तक पहुँच और आय सृजन के माध्यमों को सीमित करते हैं, जिससे बच्चों के आहार के बारे में उचित निर्णय लेने की उनकी क्षमता बाधित होती है।

घरेलू आय निर्धनता

  • पौष्टिक खाद्य पदार्थों के वहन की अक्षमता: पौष्टिक खाद्य पदार्थ, प्रमुख तौर पर पशु से प्राप्त होने वाले प्रोटीन (अंडे, माँस, मछली) और फलों व सब्जियों की कीमत, प्रायः मुख्य खाद्य पदार्थों की की अपेक्षा अधिक होती है। इससे निम्न आय अर्जित करने वाले परिवारों के लिये अपने बच्चों के लिये संतुलित आहार का खर्च वहन करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
  • उदाहरण: मुद्रास्फीति के कारण खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि होती है जिससे गरीबी में रहने वाले परिवारों की पौष्टिक खाद्य पदार्थों की पहुँच बाधित हो सकती है, जिससे उन्हें कम पौष्टिक आहार वाले विकल्पों के चयन को प्राथमिकता देनी पड़ती है।

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