- सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनटीपीसी को एटीडी बेस्ट अवार्ड्स 2024 में प्रतिभा विकास श्रेणी के लिए दुनिया में तीसरी रैंक से सम्मानित किया गया।
- यह पुरस्कार समारोह 21 मई 2024 को संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यू ऑरलियन्स शहर में आयोजित किया गया था।
- एनटीपीसी की मुख्य महाप्रबंधक, रणनीतिक मानव संसाधन एवं प्रतिभा प्रबंधन, रचना सिंह भाल ने इस समारोह में कंपनी के तरफ से पुरस्कार स्वीकार किया।
- एनटीपीसी के उत्कृष्ट मानव संसाधन प्रबंधन के कारण कंपनी ने पिछले आठ वर्षों में एटीडी बेस्ट अवार्ड्स में सात पुरस्कार जीते हैं।
एटीडी बेस्ट अवार्ड्स
- एसोसिएशन फॉर टैलेंट डेवलपमेंट (एटीडी), अमेरिका द्वारा स्थापित यह एटीडी बेस्ट अवार्ड्स, लर्निंग एंड डेवलपमेंट (एल एंड डी) के क्षेत्र में सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों में से एक है।यह पुरस्कार 2003 में शुरू किया गया था।
- यह पुरस्कार छोटे और बड़े निजी, सार्वजनिक और गैर-लाभकारी संगठनों को मान्यता देता है जो प्रतिभा विकास को एक रणनीतिक व्यवसाय उपकरण के रूप में उपयोग करते हैं और प्रभावी कर्मचारी विकास प्रथाओं के माध्यम से उद्यमव्यापी सफलता का प्रदर्शन करते हैं।
एनटीपीसी
- भारत सरकार ने 1975 में नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड के रूप में एनटीपीसी की स्थापना की। 2005 में, कंपनी का नाम बदलकर एनटीपीसी लिमिटेड कर दिया गया।
- यह भारत में बिजली क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी है।
- प्रारंभ में, यह कोयला आधारित थर्मल पावर स्टेशन के निर्माण और संचालन के व्यवसाय में था। बाद में यह पनबिजली, गैस-आधारित, सौर और पवन-आधारित बिजली उत्पादन इकाइयों में विविध हो गया।
- वर्तमान में, एनटीपीसी समूह की स्थापित क्षमता 76,015 मेगावाट है। इसमें 51 एनटीपीसी के स्वामित्व वाले बिजली स्टेशन (27 कोयला आधारित, 7 गैस आधारित, 1 हाइड्रो, 1 लघु हाइड्रो और 15 सौर पीवी) शामिल हैं।
- एनटीपीसी के 42 संयुक्त उद्यम/सहायक स्टेशन (9 कोयला आधारित, 4 गैस आधारित, 8 हाइड्रो, 1 लघु हाइड्रो, 16 सौर पीवी और 4 पवन) हैं।
- कंपनी का लक्ष्य 2032 तक गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित उत्पादन क्षमता को अपनी कुल बिजली उत्पादन का 50% तक बढ़ाना है।
- एनटीपीसी भारत के सबसे बड़े कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट, विंध्याचल थर्मल पावर प्लांट, सिंगरौली, मध्य प्रदेश में संचालित करता है। इसकी स्थापित क्षमता 4760 मेगावाट है।
- एनटीपीसी को मई 2010 में महारत्न का दर्जा प्रदान किया गया था।
