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राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने पृथ्वी दिवस के अवसर पर अपने जलवायु रणनीति 2030 दस्तावेज़ का अनावरण किया, जिसका उद्देश्य भारत की हरित वित्तपोषण की आवश्यकता को संबोधित करना है। नाबार्ड भारत में ग्रामीण क्षेत्र के वित्त पर ध्यान केंद्रित करने वाला शीर्ष विकास बैंक है।वर्ष 1982 में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक अधिनियम के तहत स्थापित, यह संसद द्वारा अनिवार्य कृषि, लघु उद्योगों, कुटीर उद्योगों एवं  ग्रामीण परियोजनाओं के लिये वित्तीय सहायता प्रदान करता है।इसका मुख्यालय मुंबई में है। 

नाबार्ड की जलवायु रणनीति

नाबार्ड की जलवायु रणनीति 2030 चार प्रमुख स्तंभों के आसपास संरचित है:

  1. हरित ऋण में तेज़ी लाना: विभिन्न क्षेत्रों में हरित वित्तपोषण बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना।
  2. बाज़ार-निर्माण की भूमिका: हरित वित्त के लिये अनुकूल बाज़ार वातावरण बनाने में व्यापक भूमिका निभाना।
  3. आंतरिक हरित परिवर्तन: नाबार्ड के संचालन के भीतर स्थायी प्रथाओं को लागू करना।
  4. रणनीतिक संसाधन संघटन: हरित पहलों का समर्थन करने के लिये प्रभावी ढंग से संसाधनों का संघटन करना।

उद्देश्य                                   

  • यह रणनीति स्थायी पहल के लिये आवश्यक निवेश और हरित वित्त के वर्तमान प्रवाह के बीच वित्तीय अंतर से निपटने के लिये डिज़ाइन की गई है।
  • भारत को वर्ष 2030 तक सालाना लगभग 170 बिलियन अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता है, जिसका कुल संचयी लक्ष्य 2.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है।
  • हालाँकि, वर्तमान हरित वित्त प्रवाह अपर्याप्त है, वर्ष 2019-20 तक केवल लगभग 49 बिलियन अमेरिकी डॉलर ही जुटाए गए थे।
  • इसके अतिरिक्त, भारत में अधिकांश वित्त शमन प्रयासों के लिये निर्धारित किया गया है, अनुकूलन और लचीलेपन के लिये केवल 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर आवंटित किये गए हैं।
  • यह बैंक योग्यता और वाणिज्यिक व्यवहार्यता में चुनौतियों के कारण इन क्षेत्रों में न्यूनतम निजी क्षेत्र की भागीदारी को दर्शाता है।

हरित वित्तपोषण

  • हरित वित्तपोषण से तात्पर्य सकारात्मक पर्यावरणीय प्रभाव वाले निवेशों का समर्थन करने के लिये वित्तीय संसाधनों के संघटन से है।
  • ये निवेश नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं एवं ऊर्जा दक्षता पहल से लेकर स्थायी बुनियादी ढाँचे के विकास और जलवायु-स्मार्ट कृषि तक हो सकते हैं।
  • महत्त्व: पारंपरिक वित्तीय प्रणाली अक्सर दीर्घकालिक पर्यावरणीय स्थिरता पर अल्पकालिक लाभ को प्राथमिकता देती है। हरित वित्तपोषण का लक्ष्य इस अंतर को समाप्त करना है:
  • निम्न-कार्बन अर्थव्यवस्था में परिवर्तन को सुविधाजनक बनाना: नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के लिये वित्त में वृद्धि करके और साथ ही हरित वित्तपोषण, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता तथा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में सहायता करता है।
  • जलवायु अनुकूलन और लचीलेपन को बढ़ावा देना: बाढ़ सुरक्षा और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों जैसे हरित बुनियादी ढाँचे में निवेश समुदायों को बदलती जलवायु के अनुकूल होने तथा प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने में सहायता कर सकता है।
  • नए आर्थिक अवसरों को ढूँढना: हरित अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव स्वच्छ प्रौद्योगिकियों और स्थायी प्रथाओं के लिये नए बाज़ार बनाता है, नवाचार व रोज़गार सृजन को प्रोत्साहित करता है।

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