Sun. Mar 29th, 2026

वर्ष 2023 में, विश्व खाद्य कीमतें अपने वर्ष 2022 के उच्चतम स्तर से काफी कम हो गईं। हालाँकि, दिसंबर, 2023 में भारत की खाद्य मुद्रास्फीति 9.5% के उच्च स्तर पर रही, जो कि -10.1% की वैश्विक अपस्फीति के विपरीत थी।संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन (FAO) का खाद्य मूल्य सूचकांक वर्ष 2022 में औसतन 143.7 अंक था, लेकिन वर्ष 2023 में गिरकर 124 अंक, यानी 13.7% की गिरावट हो गया।

वैश्विक खाद्य कीमतों में गिरावट में कौन-से कारक योगदान दे रहे हैं

  • प्रमुख फसलों की प्रचुर आपूर्ति: वर्ष 2023 में गेहूँ जैसी प्रमुख फसलों की पैदावार के कारण वैश्विक बाज़ार में अधिशेष हो गया।
  • यह प्रचुरता वर्ष 2022 की चिंताओं के विपरीत है, जब एक प्रमुख अनाज निर्यातक देश यूक्रेन, में युद्ध के कारण आपूर्ति में व्यवधान की चिंताओं के कारण कीमतें बढ़ गईं।
  • रूस और यूक्रेन से बेहतर आपूर्ति: जुलाई 2023 में ब्लैक सी ग्रेन पहल के विघटन के बावजूद, रूस और यूक्रेन दोनों गेहूँ निर्यात को बनाए रखने में सफल रहे हैं।
  • क्षेत्र से अनाज के इस निरंतर प्रवाह ने आपूर्ति संबंधी कुछ चिंताओं को कम करने में सहायता की है।
  • वनस्पति तेलों की कम मांग: संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन के वनस्पति मूल्य सूचकांक में वर्ष 2023 में सबसे बड़ी गिरावट (32.7% तक) दर्ज़ की गई।
  • यह गिरावट कई कारकों के संयोजन के कारण हुई है, जिसमें वनस्पति तेल की आपूर्ति में सुधार और जैव ईंधन उत्पादन के लिये इसके उपयोग में कमी शामिल है।
  • जैसे-जैसे खाद्य प्रयोजनों के लिये अधिक तेल उपलब्ध हो जाता है और जैव ईंधन के लिये कम उपयोग किया जाता है, वनस्पति तेल की कुल मांग कम हो जाती है, जिससे कीमतें कम हो जाती हैं।
  • मांग का कम होना: उच्च मुद्रास्फीति और आर्थिक मंदी की आशंकाओं ने प्रमुख खाद्य-आयात क्षेत्रों सहित विश्व के कई भागों में उपभोक्ता मांग को कम कर दिया है, जिससे कुछ खाद्य वस्तुओं की आयात मांग में गिरावट आई है तथा तेल की वैश्विक कीमतों पर दबाव पड़ा है।

वैश्विक खाद्य कीमतों में गिरावट के बावजूद भारत उच्च खाद्य मुद्रास्फीति का अनुभव क्यों कर रहा है

  • वैश्विक कीमतों का सीमित संचरण: जबकि वैश्विक खाद्य कीमतों में गिरावट आई, घरेलू बाज़ारों में अंतर्राष्ट्रीय कीमतों के सीमित संचरण के कारण भारत की खाद्य कीमतें ऊँची बनी रहीं।
  • भारत की आयात निर्भरता केवल खाद्य तेलों (खपत का 60%) और दालों के लिये महत्त्वपूर्ण है।
  • अनाज, चीनी, डेयरी उत्पाद एवं फलों और सब्ज़ियों सहित अधिकांश अन्य कृषि-उत्पादों के लिये, भारत आत्मनिर्भर या निर्यातक है।
  • निर्यात प्रतिबंध और आयात शुल्क: भारत सरकार ने गेहूँ, गैर-बासमती सफेद चावल, चीनी और प्याज जैसे कुछ खाद्य पदार्थों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया तथा अन्य पर आयात शुल्क में छूट प्रदान की, जिससे घरेलू कीमतों पर वैश्विक बाज़ार के प्रभाव को प्रभावी ढंग से कम किया गया।
  • घरेलू उत्पादन चुनौतियाँ: विशेष रूप से अनाज, दालों और चीनी के लिये फसल की पैदावार को प्रभावित करने वाली मौसम की स्थिति जैसे मुद्दों ने घरेलू स्तर पर आपूर्ति की कमी एवं उच्च कीमतों में योगदान दिया।
  • दिसंबर 2023 में अनाज व दाल की मुद्रास्फीति दर क्रमशः 9.9% और 20.7% थी।
  • निम्न भण्डारण स्तर: गेहूँ और चीनी जैसी वस्तुओं के लिये कम भण्डारण स्तर ने कीमतों के दबाव को और बढ़ा दिया है।

Login

error: Content is protected !!