अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकॉनोमिक जोन लिमिटेड (Adani Ports and Special Economic Zone Ltd- APSEZ) बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के सेंसेक्स में शामिल होने वाली अडानी समूह की पहली कंपनी बन जाएगी।APSEZ सेंसेक्स में विप्रो (Wipro) की जगह लेगा।APSEZ एवं अडानी समूह के प्रमुख अडानी एंटरप्राइजेज, पहले से ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में निफ्टी का हिस्सा हैं।
BSE में ‘सेंसेक्स’
- सेंसेक्स (SENSEX) का मतलब ‘स्टॉक एक्सचेंज सेंसिटिव इंडेक्स’ है और यह भारत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का बेंचमार्क इंडेक्स है। यह शब्द शेयर बाजार विशेषज्ञ दीपक मोहिनी द्वारा गढ़ा गया था।
- BSE 30: यह भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों में देश की सबसे बड़ी, वित्तीय रूप से मजबूत कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले 30 शेयरों के एक समूह का प्रतिनिधित्व करता है, जो BSE लिमिटेड पर सूचीबद्ध हैं।
- सेंसेक्स का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर EUREX के साथ-साथ BRICS देशों (ब्राजील, रूस, चीन एवं दक्षिण अफ्रीका) के प्रमुख एक्सचेंजों पर भी कारोबार होता है।
- उदाहरण: रिलायंस इंडस्ट्रीज, ICICI बैंक और ITC लिमिटेड, एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, कोल इंडिया, HCL टेक्नोलॉजीज, हिंदुस्तान यूनिलीवर, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, लार्सन एंड टुब्रो, आदि।
- शुरुआत: सेंसेक्स देश का सबसे पुराना एवं सबसे अधिक ट्रैक किया जाने वाला इंडेक्स है, जिसे वर्ष 1986 में लॉन्च किया गया था।
- यह भारत का सबसे पुराना सूचकांक (Index) है एवं वर्ष 1979 से लेकर आवधिक शृंखला डेटा प्रदान करता है।
- बाजार पूँजीकरण (Market Capitalisation): 24 मई, 2024 तक BSE-सूचीबद्ध फर्मों का कुल बाजार पूँजीकरण या सभी सूचीबद्ध शेयरों का कुल मूल्य 419.99 लाख करोड़ रुपये था।
गणना विधि (Calculation Method): सेंसेक्स की गणना ‘फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन’ पद्धति के आधार पर की जाती है, जिसका सूत्र है
| फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन = बाजार पूँजीकरण x फ्री फ्लोट फैक्टर |
एन.एस.ई. निफ्टी
- नवंबर 1995 में ‘निफ्टी 50’ की शुरुआत हुई थी।
- यह सेंसेक्स से व्यापक आधार वाला इंडेक्स है जिसमें एन.एस.ई. पर कारोबार करने वाले 50 ब्लू चिप बड़े व लिक्विड स्टॉक शामिल हैं।
- यह सूचकांक भारत की शीर्ष कंपनियों के पोर्टफोलियो का प्रतिनिधित्व करता है, जो एन.एस.ई. के फ्लोट-एडजस्टेड मार्केट कैपिटलाइजेशन का लगभग 65% हिस्सा रखता है।
- इसमें अडानी एंटरप्राइजेज, बजाज फाइनेंस एवं कोल इंडिया जैसी कंपनियां शामिल हैं।
- 24 मई, 2024 तक एन.एस.ई. फर्मों का बाजार पूंजीकरण 416.04 लाख करोड़ रुपए था।
फ्री फ्लोट मार्केट कैपिटलाइज़ेशन
- फ्री-फ्लोट पद्धति स्टॉक मार्केट इंडेक्स की अंतर्निहित कंपनियों के बाजार पूंजीकरण की गणना करने की एक विधि है।
- फ्री-फ्लोट पद्धति के साथ बाजार पूंजीकरण की गणना इक्विटी की कीमत लेकर और उसे बाजार में आसानी से उपलब्ध शेयरों की संख्या से गुणा करके की जाती है।
- पूर्ण-बाज़ार पूंजीकरण पद्धति की तरह सभी शेयरों (सक्रिय एवं निष्क्रिय दोनों शेयरों) का उपयोग करने के बजाय फ्री-फ्लोट पद्धति में लॉक-इन शेयरों को शामिल नहीं किया जाता है, जैसे कि आंतरिक लोगों, प्रमोटरों व सरकारों के पास रखे गए शेयर।
शेयर सूचकांक में चयन के लिए मानदण्ड
- शेयर सूचकांकों का पुनर्गठन हर साल जून एवं दिसंबर में दो बार किया जाता है।
- चयन के लिए बी.एस.ई./एन.एस.ई. में कम-से-कम छह महीने का लिस्टिंग इतिहास (अवधि) होना चाहिए तथा इस छह महीने की संदर्भ अवधि के दौरान प्रत्येक कारोबारी दिन कारोबार किया जाना चाहिए।
- इसका पात्र होने के लिए स्टॉक में डेरिवेटिव अनुबंध होना चाहिए, अर्थात भविष्य में किसी निश्चित कीमत पर किसी भी प्रकार की प्रतिभूति को खरीदने या बेचने के लिए दो पक्षों के बीच एक समझौता होना चाहिए।
- डेरिवेटिव एक वित्तीय साधन है जिसका मूल्य इक्विटी एवं मुद्रा जैसी अंतर्निहित परिसंपत्ति के मूल्य पर आधारित होता है।
- बी.एस.ई. के लिए कंपनी को अपने औसत तीन महीने के फ्लोट या कुल मार्केट कैप के आधार पर शीर्ष 75 कंपनियों में से एक होना चाहिए।
- मार्केट कैप एवं लिक्विडिटी (तरलता) मानदंड पूरा होने के बाद इसका न्यूनतम फ्री-फ्लोट मार्केट कैप 0.50% होना चाहिए।
- तरलता के संदर्भ में तीन महीने के औसत दैनिक कारोबार मूल्य का संचयी भार उन कंपनियों के लिए गणना किया जाता है जो पात्रता आवश्यकताओं को पूरा करती हैं।
- ‘निफ्टी 50’ सूचकांक एक मुक्त फ्लोट बाजार पूंजीकरण-भारित सूचकांक है।
- एन.एस.ई. आवश्यकताओं के अनुसार, तरलता के संबंध में अर्हता प्राप्त करने के लिए संगठन के शेयरों में विगत 6 महीनों में 100% ट्रेडिंग वॉल्यूम होना चाहिए।
- 100 मिलियन रुपए के बास्केट आकार के लिए 90% अवलोकनों के लिए पिछले छह महीनों के दौरान 0.50% या उससे कम की औसत प्रभावी लागत पर कारोबार किया जाना चाहिए।
