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विश्व आर्थिक मंच ने बेन एंड कंपनी के साथ मिलकर एक रिपोर्ट जारी की है, जिसका शीर्षक है- हरित हाइड्रोजन:भारत में अपनाने के लिये सक्षम उपाय संबंधी रोडमैप, इस बात पर प्रकाश डालता है कि हरित हाइड्रोजन उत्पादन लागत को 2 अमेरिकी डॉलर प्रति किलोग्राम से कम या उसके बराबर करने की आवश्यकता है।

रिपोर्ट की मुख्य बातें

भारत में बढ़ने ऊर्जा की मांग

  • भारत वर्तमान में ऊर्जा ज़रूरतों के मामले में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और देश की ऊर्जा की मांग वर्ष 2030 तक 35% बढ़ने का अनुमान है।
  • वर्ष 2022 में, भारत का ऊर्जा आयात बिल 185 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जो बढ़ने की संभावना है, अगर देश पारंपरिक तरीकों के माध्यम से अपनी बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करना जारी रखता है।
  • वहीं, भारत ने वर्ष 2021 में ग्लासगो में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (United Nations Climate Change Conference in Glasgow – COP26) में वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन हासिल करने की प्रतिबद्धता जताई है।

हरित हाइड्रोजन की गंभीरता

  • हरित हाइड्रोजन भारत की ऊर्जा सुरक्षा ज़रूरतों को पूरा करने में मदद करने के लिये महत्त्वपूर्ण है, साथ ही शुद्ध शून्य की राह पर कठिन क्षेत्रों में उत्सर्जन को कम करने में भी मदद करता है।
  • इसके संदर्भ में, भारत सरकार ने वर्ष 2022 में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन शुरू किया।
  • इसका उद्देश्य वर्ष 2022 और वर्ष 2030 के बीच वितरित की जाने वाली प्रोत्साहन निधि में लगभग 2.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर के माध्यम से हरित हाइड्रोजन उत्पादन तथा खपत को बढ़ावा देना है।

भारत में हाइड्रोजन उत्पादन की वर्तमान स्थिति

  • वर्तमान में, भारत मुख्य रूप से कच्चे तेल रिफाइनरियों और उर्वरक उत्पादन में उपयोग के लिये 6.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) हाइड्रोजन का उत्पादन करता है।
  • भारत की अधिकांश वर्तमान हाइड्रोजन आपूर्ति ग्रे हाइड्रोजन है, जो कार्बन डाई ऑक्साइड गैस उत्सर्जन पैदा करने वाली प्रक्रिया में जीवाश्म ईंधन का उपयोग करके उत्पादित की जाती है।
  • हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिये इलेक्ट्रोलिसिस/विद्युत अपघटन  प्रक्रिया हेतु नवीकरणीय ऊर्जा की पर्याप्त आपूर्ति की आवश्यकता होती है।
  • भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हरित हाइड्रोजन विकास के लिये इसके लक्ष्यों का समर्थन कर सकती है, लेकिन तेज़ी से क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता है– हरित हाइड्रोजन उत्पन्न करने के साथ-साथ देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये अतिरिक्त क्षमता की आवश्यकता है।
  • देश में हरित हाइड्रोजन के लिये ज़मीनी स्तर पर संभावनाएँ सीमित हैं; अधिकांश “वेट एंड वाॅच (wait-and-watch)” चरण में हैं। कई लोगों को उम्मीद है कि वर्ष 2027 और उसके बाद हरित हाइड्रोजन का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू हो जाएगा।

हरित हाइड्रोजन में बाधाएँ

  • भारत में हरित हाइड्रोजन के विस्तार के लिये गंभीर बाधाओं में आपूर्ति पक्ष, उत्पादन और वितरण की लागत, मांग पक्ष पर, पारंपरिक औद्योगिक प्रक्रियाओं में हरित हाइड्रोजन का उपभोग करने के लिये भारतीय उद्यमियों की तत्परता शामिल है।

भारत में हरित हाइड्रोजन के विकास के लिये रिपोर्ट द्वारा प्रस्तावित ब्लूप्रिंट

हरित हाइड्रोजन के उत्पादन की लागत कम करना

  • आज भारत में हरित हाइड्रोजन के उत्पादन की लागत लगभग 4-5 अमेरिकी डॉलर प्रति किलोग्राम है, जो ग्रे हाइड्रोजन की उत्पादन लागत से लगभग दोगुनी है।
  • हरित हाइड्रोजन (50-70%) की अधिकांश उत्पादन लागत चौबीसों घंटे (RTC) नवीकरणीय ऊर्जा की आवश्यकता से उत्प्रेरित है।
  • भारत में हरित ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिये हरित हाइड्रोजन को 2 अमेरिकी डॉलर प्रति किलोग्राम के बेंचमार्क लक्ष्य तक लाने की आवश्यकता है।

जैसे:

  • प्रारंभिक चरण में अडॉप्टर्स (अपनाने वालों) के लिये प्रत्यक्ष सब्सिडी बढ़ाना – उदाहरण के लिये संयुक्त राज्य अमेरिका ने मुद्रास्फीति कटौती अधिनियम (IRA) के तहत, हाइड्रोजन पर 3 अमेरिकी डॉलर/किलोग्राम तक कर क्रेडिट की घोषणा की है।
  • नीतियों और प्रोत्साहनों पर दीर्घकालिक स्पष्टता के साथ प्रौद्योगिकियों के लिये लंबे पूंजी निवेश चक्रों का समर्थन करना
  • स्वदेशी इलेक्ट्रोलाइज़र प्रौद्योगिकी के विकास और परीक्षण को प्रोत्साहित करना

हरित हाइड्रोजन रूपांतरण, भंडारण और परिवहन से संबंधित लागत कम करना

  • कम उत्पादन लागत के बावजूद, बुनियादी ढाँचे के खर्च (रूपांतरण सुविधाएँ, भंडारण और परिवहन) हरित हाइड्रोजन और इसके डेरिवेटिव की समग्र लागत को महत्त्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
  • इस बुनियादी ढाँचे की स्थापना की लागत को कम करने से वितरण लागत कम होगी और कुल व्यापार में वृद्धि होगी।

इसे प्राप्त करने के लिये आवश्यक हस्तक्षेप हैं

  • अल्प से मध्यम अवधि में, हरित हाइड्रोजन उत्पादन समूहों का विकास करना जहाँ उत्पादन और कुल व्यापार के लिये एक सहयोगी वातावरण निकटता में होता है।
  • पूरे देश में हरित हाइड्रोजन के परिवहन के लिये पाइपलाइनों सहित दीर्घकालिक बुनियादी ढाँचे के निर्माण में निवेश करना।
  • उदाहरण के लिये यूरोपीय संघ के यूरोपीय हाइड्रोजन बैकबोन कार्यक्रम का लक्ष्य यूरोपीय संघ में एक पाइपलाइन नेटवर्क विकसित करना है।

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