भारत सरकार ने हाल ही में लद्दाख में दक्षिण पूर्व एशिया के पहले नाइट स्काई अभयारण्य की स्थापना की घोषणा की।यह चांगथांग वन्यजीव अभयारण्य के एक हिस्से के रूप में पूर्वी लद्दाख के हनले गाँव में स्थित होगा।इसकी स्थापना भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान बंगलुरु की सहायता से की जा रही है, जो भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग से संबद्ध है।1,073 वर्ग किलोमीटर में फैला, यह भारतीय खगोलीय वेधशाला के निकट स्थित है, जो दुनिया का दूसरा सबसे ऊँचा ऑप्टिकल टेलीस्कोप है। यह भारत में खगोल-पर्यटन को बढ़ावा देगा तथा ऑप्टिकल, इन्फ्रा-रेड और गामा-रे दूरबीनों के लिये विश्व के सबसे शीर्षस्थ स्थानों में से एक होगा।
डार्क स्काई स्थानों के प्रमुख प्रकार
एक अमेरिकी गैर-लाभकारी संस्था इंटरनेशनल डार्क स्काई एसोसिएशन, स्थानों को उनके द्वारा पूरा किये गए मानदंडों के आधार पर इंटरनेशनल डार्क स्काई प्लेस, पार्क, अभयारण्य एवं रिज़र्व के रूप में नामित करती है:
- डार्क स्काई पार्क: ये सार्वजनिक अथवा निजी स्वामित्व वाले संरक्षित क्षेत्र हैं, जो प्रभावी आउटडोर प्रकाश व्यवस्था प्रथाओं का उपयोग करते हैं तथा काले आकाश (डार्क स्काई) का अनुभव करने पर केंद्रित कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं।
- डार्क स्काई अभयारण्य: ये अत्यंत दुर्गम और अमूमन पृथ्वी पर मौजूद सर्वाधिक अंधेरे वाले स्थान होते हैं। उनकी नाज़ुक स्थिति के कारण उन्हें दृढ़ संरक्षण उपायों की आवश्यकता होती है।
- डार्क स्काई रिज़र्व: इन रिज़र्व्स में एक निर्धारित डार्क “कोर” ज़ोन होता है जो आबादी वाले क्षेत्रों से घिरा हुआ होता है। आस-पास के समुदायों को समायोजित करते हुए कोर ज़ोन के अंधेरे को सुरक्षित रखने के लिये नीतियाँ लागू की जाती हैं।
- अर्बन नाइट स्काई प्लेस: कृत्रिम प्रकाश के बावजूद ये शहरी (Urban) स्थान एक वास्तविक रात्रि अनुभव प्रदान करने का प्रयास करते हैं। यहाँ ऐसे वातावरण प्रदर्शित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है जहाँ लोग अभी भी रात्रि के आकाश की सराहना कर सकें।
- डार्क स्काई समुदाय: डार्क स्काई समुदाय एक शहर, नगर पालिका या अन्य कानूनी रूप से संगठित समुदाय है, शहरों एवं कस्बों को उनकी गुणवत्तापूर्ण आउटडोर प्रकाश व्यवस्था के नियमों और निवासियों को डार्क स्काई (काले आसमान) के संरक्षण के महत्त्व के बारे में शिक्षित करने के प्रयासों के लिये जाना जाता है।
