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भारत का लक्ष्य वर्ष 2030 तक सकल घरेलू उत्पाद में जैव अर्थव्यवस्था के योगदान को 2.6% से बढ़ाकर 5% करना है, जैसा कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) द्वारा ‘बायोइकोनॉमी रिपोर्ट 2022’ में बताया गया है।भारत में जैव प्रौद्योगिकी वित्तपोषण सकल घरेलू उत्पाद का केवल 0.0001% आवंटन के साथ स्थिर बना हुआ है। कोविड-19 के दौरान अस्थायी वृद्धि के बावजूद वित्तपोषण का स्तर महामारी-पूर्व मानकों पर वापस नहीं आया है।अप्रैल 2023 में DBT द्वारा जारी ‘आनुवंशिक रूप से संशोधित (Genetically Engineered- GE) कीटों के लिये दिशा-निर्देश’ उन लोगों हेतु प्रक्रियात्मक रोडमैप प्रदान करते हैं जो GE कीट निर्माण में रुचि रखते हैं लेकिन उनकी अपनी समस्याएँ हैं।

जैव अर्थव्यवस्था

  • संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, जैव अर्थव्यवस्था “एक सतत् अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने के उद्देश्य से सभी आर्थिक क्षेत्रों को सूचना, उत्पाद, प्रक्रियाएँ और सेवाएँ प्रदान करने के लिये संबंधित ज्ञान, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सहित जैविक संसाधनों का उत्पादन, उपयोग तथा संरक्षण है”।
  • यूरोपीय संघ (EU) तथा आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) द्वारा नए उत्पादों एवं बाज़ारों को विकसित करने के लिये जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देने हेतु एक रूपरेखा के रूप में अपनाए जाने के बाद 21वीं सदी के पहले दशक में लोकप्रिय हुआ। तब से यूरोपीय संघ और OECD दोनों ने विशिष्ट जैव-आर्थिक नीतियों को लागू किया है।

बायोइकोनॉमी रिपोर्ट 2022 की मुख्य विशेषताएँ

  • भारत की जैव अर्थव्यवस्था मज़बूत विकास पथ पर है, जिसके वर्ष 2025 तक 150 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने और वर्ष 2030 तक 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक होने का अनुमान है।
  • इस क्षेत्र में उल्लेखनीय 14.1% की वृद्धि हुई, जो वर्ष 2020 के 70.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर की तुलना में वर्ष 2021 में 80 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गई।
  • जैव अर्थव्यवस्था ने प्रतिदिन 219 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य का उत्पादन किया, जो इसके महत्त्वपूर्ण आर्थिक प्रभाव को दर्शाता है।
  • वर्ष 2021 में इस क्षेत्र में प्रतिदिन तीन बायोटेक स्टार्टअप की स्थापना हुई, जो वर्ष में कुल 1,128 थीं।
  • अनुसंधान और विकास में 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के निवेश के साथ यह उद्योग नवाचार और उन्नति के प्रति प्रतिबद्धता प्रदर्शित कर रहा है।
  • वैश्विक महामारी के बीच भारत ने अपने लचीलेपन और क्षमता का प्रदर्शन करते हुए 4 मिलियन कोविड-19 वैक्सीन खुराक  प्रदान की और प्रतिदिन 3 मिलियन परीक्षण किये।
  • पिछले एक दशक में बायोटेक स्टार्टअप्स की संख्या 50 से बढ़कर 5,300 से अधिक हो गई है तथा वर्ष 2025 तक दोगुनी होने की उम्मीद है।
  • जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) ने जैव-उद्यमियों के लिये एक सहायक वातावरण को बढ़ावा देने, 21 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 74 जैव-ऊष्मायन केंद्र स्थापित करके महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • विशेष रूप से भारत अमेरिका के बाहर USFDA (यूनाइटेड स्टेट्स फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) द्वारा अनुमोदित विनिर्माण संयंत्रों की दूसरी सबसे बड़ी संख्या का दावा करता है, जो बायोटेक उद्योग में इसकी वैश्विक स्थिति को रेखांकित करता है।

आनुवंशिक रूप से संशोधित कीट

  • GE कीट ऐसे जीव हैं जिनकी आनुवंशिक सामग्री को विशिष्ट वांछित लक्षण अथवा विशेषताओं को पेश करने के लिये आनुवंशिक संशोधन तकनीकों के माध्यम से परिवर्तित कर दिया गया है।
  • इसमें कीट के DNA में इस तरह से हेर-फेर करना शामिल है जो स्वाभाविक रूप से नहीं होता है, अक्सर कुछ लाभ प्रदान करने या विशिष्ट मुद्दों को संबोधित करने के उद्देश्य से।
  • इसमें अमूमन लाभ प्रदान करने अथवा विशेष समस्याओं को हल करने के प्रयास में कीट के DNA को इस तरह से संशोधित करना शामिल है जो प्रकृति में नहीं देखा जाता है।

अनुप्रयोग

GE कीटों का विकास विभिन्न क्षेत्रों में अनुप्रयोग प्रदान करता है, जैसे-

  • मानव व पशुधन स्वास्थ्य में वेक्टर प्रबंधन
  • प्रमुख फसल कीटों का प्रबंधन
  • रसायनों के उपयोग में कमी के माध्यम से मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण का रखरखाव तथा उसमें सुधार
  • स्वास्थ्य देखभाल प्रयोजनों के लिये प्रोटीन का उत्पादन
  • शिकारी, परजीवी, परागणकर्त्ता (जैसे मधुमक्खी) अथवा उत्पादक कीट (जैसे रेशमकीट, लाख कीट) आदि लाभकारी कीटों का आनुवंशिक सुधार।

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