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जलवायु संकट से निपटने की तात्कालिकता कभी इतनी अधिक स्पष्ट नहीं रही जितनी वर्तमान में है । जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के सामने, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने दो प्रमुख पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया है,प्रथम, अनुकूलन : ‘नुकसान और क्षति कोष ‘ (एल एंड डी)। अनुकूलन में जलवायु परिवर्तन के प्रति सक्रिय प्रतिक्रियाएँ शामिल हैं, जिससे समुदायों और देशों को जलवायु संबंधी चुनौतियों के लिए तैयारी करने और उनका सामना करने में सक्षम बनाया जा सके। दूसरी ओर, एलएंडडी जलवायु परिवर्तन के अपरिवर्तनीय परिणामों को शामिल करता है, जिसमें आर्थिक नुकसान, मानव हताहत और पर्यावरणीय गिरावट शामिल है।

नुकसान और क्षति कोष (L&D कोष) की स्थापना

  • जलवायु परिवर्तन के लिए ऐतिहासिक जिम्मेदारी स्वीकार करने के लिए समृद्ध देशों के आह्वान का इतिहास तीन दशक से भी अधिक पुराना है। 2013 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (UNFCCC) के पार्टियों के 19वें सम्मेलन (COP 19) में, सदस्य देशों ने L&D कोष स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की। इस कोष का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के कारण नुकसान और क्षति का सामना कर रहे आर्थिक रूप से विकासशील देशों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करना था।
  • प्रारंभिक समझौतों के बावजूद, बाद की COP बैठकों को कोष को कार्यात्मक बनाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिससे बातचीत और चर्चाओं की एक श्रृंखला शुरू हुई।

लॉस एंड डैमेज फंड

  • ‘लॉस एंड डैमेज’ (L&D) फंड एक वित्तीय सहायता तंत्र है जिसे जलवायु परिवर्तन के उन अपरिवर्तनीय परिणामों का समाधान करने के लिये डिज़ाइन किया गया है जिन्हें अनुकूलन प्रयासों के माध्यम से टाला अथवा कम नहीं किया जा सकता है।
  • अनुकूलन प्रयास जलवायु परिवर्तन के प्रति सक्रिय प्रतिक्रिया और जीवित रहने की कला है जिसका उपयोग कर समुदाय एवं देश जलवायु-संबंधी चुनौतियों से निपटने तथा तैयारी के लिये कारागार विकल्प चुनते हैं।
  • इस फंड का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण समुदायों, देशों और पारिस्थितिक तंत्रों को हुई हानि की पहचान करना है तथा उसकी क्षतिपूर्ति करना है।
  • ये हानियाँ मौद्रिक मूल्य से परे हैं तथा मूलतः मानव अधिकारों, कल्याण एवं पर्यावरणीय स्थिरता को प्रभावित करते हैं।

L&D फंड की उत्पत्ति एवं विकास

ऐतिहासिक जवाबदेही तथा शुरुआत

  • 30 वर्षों से समृद्ध देशों से उनके ऐतिहासिक प्रदूषण के प्रति ज़िम्मेदारी को स्वीकार करने का लगातार आह्वान किया जाता रहा है, जिसने विश्व की औसत सतह के तापमान को 1 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ा दिया है।
  • यह ऐतिहासिक प्रदूषण वर्तमान में विश्व भर में विशेषकर सबसे गरीब देशों को गंभीर रूप से क्षति पहुँचा रहा है।

COP-19 (2013)

  • वर्ष 2013 में वारसॉ, पोलैंड में जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क अभिसमय (United Nations Framework Convention on Climate Change- UNFCCC) के लिये पक्षकारों के 19वें सम्मेलन (COP-19) में औपचारिक समझौते के परिणामस्वरूप लॉस एंड डैमेज फंड की स्थापना हुई।
  • यह कोष विशेष तौर पर उन आर्थिक रूप से विकासशील देशों को वित्तीय एवं तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिये स्थापित किया गया था जो जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली हानि एवं क्षति से प्रभावित थे।

बाद के विकास और चुनौतियाँ

COP-25

  • COP-19 के बाद L&D के लिये सैंटियागो नेटवर्क COP-25 में स्थापित किया गया था। हालाँकि इस बिंदु पर देशों ने पहल का समर्थन करने हेतु कोई धनराशि नहीं दी।

COP-26

  • ग्लासगो में वर्ष 2021 में आयोजित COP-26 जलवायु शिखर सम्मेलन का उद्देश्य फंड के संचालन के संबंध में अगले तीन वर्षों में वार्ता को जारी रखना था।

COP-27 (नवंबर 2022)

  • COP-27 में व्यापक चर्चा के बाद UNFCCC के सदस्य देशों के प्रतिनिधि L&D फंड स्थापित करने पर सहमत हुए। इसके अतिरिक्त यह पता लगाने के लिये एक ट्रांज़िशनल कमेटी (TC) की स्थापना की गई थी कि फंड के तहत नए फंडिंग तंत्र का संचालन किस प्रकार से होगा।
  • TC को सिफारिशें तैयार करने का काम सौंपा गया था, जिन पर COP-28 के दौरान विचार किया जा सके तथा देशों द्वारा संभावित रूप से उन सिफारिशों को अपनाया जा सके।

TC-4 और TC-5 पर गतिरोध

TC-4 की बैठक

  • TC-4 की चौथी बैठक में L&D फंड के संचालन पर कोई स्पष्ट सहमति नहीं बन पाई।
  • विवाद के प्रमुख बिंदुओं में विश्व बैंक में फंड की मेज़बानी, साझा किंतु विभेदित उत्तरदायित्व (Common But Differentiated Responsibility- CBDR) का मूलभूत सिद्धांत, जलवायु क्षतिपूर्ति से संबंधित मुद्दे और फंड के लिये सभी विकासशील देशों की पात्रता शामिल है।

TC-5 की बैठक

  • TC5 की सिफारिशों का मसौदा तैयार कर लिया गया है और COP 28 को भेज दिया गया है।

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