संयुक्त राज्य अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने हाल ही में विगत चार वर्षों में खाद्य पदार्थों के के आयात से संबंधित जानकारी जारी की है जिसके अनुसार अमेरिका ने खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता मानकों के आधार पर भारत, मैक्सिको तथा चीन जैसे देशों से खाद्य पदार्थों के निर्यात को कम किया है। यह डेटा अमेरिकी बाज़ार में भारतीय खाद्यान निर्यातकों के समक्ष आने वाली बाधाओं को उजागर करता है। अमेरिका में भारत के खाद्य पदार्थों के निर्यात की अस्वीकृति एक गंभीर मुद्दा बनी हुई है।
निर्यात अस्वीकृति से संबंधित प्रमुख पहलू
खाद्यान निर्यात में अस्वीकृति के आँकड़े: भारत, मेक्सिको तथा चीन
- भारत, मैक्सिको तथा चीन ने अक्तूबर 2019 एवं सितंबर 2023 के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका को निर्यात खाद्य शिपमेंट की अस्वीकृति में वृद्धि का अनुभव किया।
- भारत द्वारा निर्यात खाद्यान की अस्वीकृति दर 0.15% थी, जो सभी खाद्य निर्यात शिपमेंट में से अस्वीकार किये गए शिपमेंट के प्रतिशत को दर्शाती है।
- इसकी तुलना में चीन और मेक्सिको की अस्वीकृति दर क्रमशः 0.022% तथा 0.025% थी।
- भारत की अस्वीकृति दर काफी अधिक है, जो कुल निर्यात के सापेक्ष अस्वीकृति की अधिक घटनाओं का संकेत देती है।
अस्वीकृति के पीछे प्रमुख कारक
- ये उत्पाद पूर्णतः या आंशिक रूप से गंदे, सड़े हुए या विघटित पदार्थों से युक्त थे तथा भोजन के लिये अनुपयुक्त थे।
- इन उत्पादों में साल्मोनेला (Salmonella) नामक बैक्टीरिया मौजूद था जो पेट में गंभीर संक्रमण का कारण बनता है।
- इन उत्पादों में एक अप्रमाणित नई दवा, एक असुरक्षित खाद्य योज्य अथवा एक निषिद्ध पदार्थ का उपयोग किया गया।
- उत्पादों की पोषण संबंधी लेबल, सामग्री की जानकारी या स्वास्थ्य दावों के संदर्भ में गलत ब्रांडिंग की गई थी।
भारत की अस्वीकृति में दीर्घकालिक प्रचालन
- पिछले दशक में भारत के खाद्य निर्यात अस्वीकृति में गिरावट देखी गई। वर्ष 2015 में अस्वीकृत शिपमेंट्स की संख्या 1,591 थी, जो वर्ष 2023 में घटकर1,033 रह गई है।
- इन अस्वीकृतियों के बावजूद, वित्त वर्ष 2023 में भारत का खाद्य निर्यात अमेरिका में 1.45 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जो पिछले वित्तीय वर्ष से 16% की वृद्धि को दर्शाता है। प्रमुख निर्यातों में बासमती चावल, प्राकृतिक शहद, ग्वार गम और अनाज से निर्मित उत्पाद शामिल थे।
खाद्य आयात अस्वीकृति का समर्थन करने वाले अंतर्राष्ट्रीय उपाय
- विश्व व्यापार संगठन (WTO) का सैनिटरी एंड फाइटो सैनिटरी (SPS) समझौता यह सुनिश्चित करता है कि WTO सदस्यों के बीच विपणित उत्पाद (ऐसे उत्पाद जिनका व्यापार किया जा चुका है) बीमारियाँ नहीं फैलाते हैं तथा खाद्य उत्पादों में हानिकारक पदार्थ या रोगजनक नहीं होते हैं।
- “SPS समझौता” 1 जनवरी 1995 को विश्व व्यापार संगठन की स्थापना के साथ लागू हुआ।
- WTO में भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कुल 164 सदस्य देश हैं।
- सदस्यों को मानव, पशु या पौधों के जीवन और स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिये सैनिटरी एंड फाइटोसैनिटरी उपायों को लागू करने का अधिकार है, बशर्ते ऐसे उपाय इस समझौते के अनुरूप हों।
- समझौते के अनुच्छेद 5(7) में दिये गए प्रावधानों को छोड़कर, उपाय वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित और वैज्ञानिक साक्ष्यों द्वारा समर्थित होने चाहिये।
- उपायों में सदस्यों के बीच अनुचित भेदभाव नहीं होना चाहिये और सदस्यों को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर प्रच्छन्न प्रतिबंध के रूप में कार्य नहीं करना चाहिये।
- एक WTO सदस्य को अन्य सदस्यों से समान सैनिटरी एंड फाइटोसैनिटरी उपाय स्वीकार करने होंगे, भले ही वे उसकी आवश्यकताओं से भिन्न हों।
- निर्यातक सदस्य को यह सिद्ध करना होगा कि उसके उपाय आयातक सदस्य की सुरक्षा के आवश्यक पहलुओं को पूर्ण करते हैं।
- अनुरोध पर निरीक्षण और परीक्षण के लिये पहुँच प्रदान की जानी चाहिये।
