भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने त्वरित उपचारात्मक कार्रवाई (PCA) प्रारूप के तहत सख्त निगरानी मानदंड अक्टूबर, 2024 से सरकारी स्वामित्व वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) पर लागू हो जाएंगे।किसी वित्तीय इकाई को PCA प्रारूप के तहत रखे जाने पर उसके लाभांश वितरण/ मुनाफे को कहीं भेजने, प्रवर्तकों/ शेयरधारकों को इक्विटी में निवेश या बिक्री करने और समूह कंपनियों की ओर से गारंटी देने या अन्य आकस्मिक देनदारियां लेने पर बंदिशें लग जाती हैं।
मुख्य बिंदु
- यह कार्रवाई 31 मार्च, 2024 या उसके बाद इन एनबीएफसी की ऑडिटेड वित्तीय स्थिति पर आधारित होगा।
- पीसीए ढांचे का उद्देश्य उचित समय पर पर्यवेक्षी हस्तक्षेप को सक्षम करना है और पर्यवेक्षित इकाई को समय पर उपचारात्मक उपाय शुरू करने तथा लागू करने की आवश्यकता है, ताकि उसके वित्तीय स्थिति को सुधारा जा सके।
- पीसीए ढांचे का उद्देश्य प्रभावी बाजार अनुशासन के लिए एक उपकरण के रूप में कार्य करना भी है।
- पीसीए ढांचा भारतीय रिजर्व बैंक को ढांचे में निर्धारित सुधारात्मक कार्रवाइयों के अलावा किसी भी अन्य उचित समझे जाने वाले कार्रवाई को करने से नहीं रोकता है।
- एनबीएफसी के लिए पीसीए ढांचा 31 मार्च, 2022 को और उसके बाद एनबीएफसी की वित्तीय स्थिति के आधार पर 1 अक्टूबर, 2022 से लागू हुआ।
- केंद्रीय बैंक ने दिसंबर,2021 में एनबीएफसी को इस आशय के लिए एक परिपत्र जारी किया था।
सुधारात्मक कार्रवाई
आरबीआई ने एनबीएफसी/कोर निवेश कंपनियों (सीआईसी) के लिए सुधारात्मक कार्रवाइयों का एक मेनू तैयार किया है, जो जोखिम सीमा के उल्लंघन के स्तर पर निर्भर करता है
- पूंजी पर जोखिम-भारित संपत्ति अनुपात
- टियर- I पूंजी अनुपात
- एनबीएफसी के लिए शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात
- समायोजित निवल मूल्य/कुल जोखिम भारित संपत्ति
- उत्तोलन अनुपात (leverage ratio)
- सीआईसी के लिए गैर-निष्पादित निवेश सहित एनएनपीए
सुधारात्मक कार्रवाइयों में लाभांश वितरण/लाभ के प्रेषण पर प्रतिबंध शामिल है
- प्रवर्तकों/शेयरधारकों को इक्विटी बढ़ाने और उत्तोलन कम करने की आवश्यकता
- समूह कंपनियों की ओर से गारंटी जारी करने या अन्य आकस्मिक देनदारियां लेने पर प्रतिबंध (केवल सीआईसी के लिए)
- शाखा विस्तार पर प्रतिबंध
- विशेष पर्यवेक्षी कार्रवाई
- शासन, पूंजी, लाभप्रदता और व्यवसाय से संबंधित विवेकाधीन कार्य
त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई
- भारतीय रिज़र्व बकैं (आरबीआई) का त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) ढांचा इसके वित्तीय स्थिरता फ्रेमवर्क का एक अनिवार्य तत्त्व है।
- यह ऐसे बैंकों के विनियामकों को शीघ्र हस्तक्षेप और समाधान की एक व्यवस्था उपलब्ध कराता है, जिनकी पूंजी खराब आस्ति गुणवत्ता के कारण अपर्याप्त रह जाती है या जो लाभप्रदता कम हो जाने के कारण कमजोर पड़ जाते हैं।
गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी
- गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी एक ऐसी कंपनी है जो कंपनी अधिनियम, 1956 के अंतर्गत पंजीकृत है।
- वह ऋण और अग्रिम देने, शेयरों/स्टॉक/बांड्स/डिबेंचरों/सरकार या स्थानीय प्राधिकरणों द्वारा जारी प्रतिभूतियों या उसी प्रकार के बिक्री योग्य अन्य प्रतिभूतियों के अधिग्रहण, पट्टे पर देने, किराया-खरीद(हायर-पर्चेज), बीमा कारोबार, चिट संबंधी कारोबार में लगी हों।
- किंतु उनमें ऐसी कोई संस्था शामिल नहीं होनी चाहिए, जिनका मूल कारोबार कृषि कार्य, औद्योगिक गतिविधि, किसी वस्तु की खरीद बिक्री (प्रतिभूतियों के अलावा) अथवा कोई सेवा प्रदान करना तथा अचल संपत्ति की खरीद/बिक्री/निर्माण है।
- ऐसी गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्था जो एक कंपनी है और जिसका मूल कारोबार किसी योजना या प्रबंध या किसी अन्य प्रकार से जमा राशियां प्राप्त करना है, वह भी एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (अवशिष्ट गैर बैंकिंग कंपनी) है।
