केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के इनपुट के साथ 18 मंत्रालयों के समन्वय से महिला बाल विकास मंत्रालय ने राष्ट्रीय प्रोटोकॉल का मसौदा तैयार किया है, जो कुपोषित बच्चों की पहचान और प्रबंधन के लिए विस्तृत उपाय प्रदान करता है।
प्रमुख बिंदु
- महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने बच्चों में कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए 10 अक्टूबर 2023 को नई दिल्ली में नये राष्ट्रीय सामुदायिक प्रबंधन कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।
- इस प्रोटोकॉल को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास (डब्ल्यूसीडी) मंत्रालय ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा आयुष मंत्रालय के सहयोग से लागू किया है।
- यह प्रोटोकॉल देश में कुपोषित बच्चों की पहचान करने और उन्हें व्यापक देखभाल प्रदान करने के लिए एक व्यापक मार्गदर्शिका है।
- यह प्रोटोकॉल गंभीर तीव्र कुपोषण (severe acute malnutrition) (SAM) से पीड़ित बच्चों की पहचान, स्वस्थ वजन के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं और यहां तक कि बच्चों में कुपोषण के विभिन्न स्तरों के लिए आहार आवश्यकताओं पर व्यापक मानदंडों को विस्तार से परिभाषित करता हैं।
- प्रोटोकॉल आंगनवाड़ी स्तर पर कुपोषित बच्चों की पहचान और प्रबंधन के लिए विस्तृत कदम भी प्रदान करेगा जिसमें रेफरल, पोषण प्रबंधन और अनुवर्ती देखभाल के लिए निर्णय लेना शामिल है।
- कुपोषण तब होता है जब किसी व्यक्ति के आहार में शरीर के समुचित कार्य के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण पोषक तत्वों और ऊर्जा की कमी होती है।
- कुपोषण में अल्पपोषण और अतिपोषण दोनों शामिल हैं।
- बच्चों में कुपोषण के प्रबंधन के लिए यह प्रोटोकॉल बच्चों में कुपोषण की जांच करेगा ताकि बच्चे स्वस्थ हो सकें।
- सरकार पोषण अभियान के कार्यान्वयन के माध्यम से कुपोषण के मुद्दों से निपट रही है।
- कुपोषित बच्चों की पहचान और उनका उपचार मिशन पोषण 2.0 का एक अभिन्न पहलू है और पोषण माह के दौरान 17 करोड़ से अधिक गतिविधियाँ हुईं।
- प्रोटोकॉल समग्र दृष्टिकोण के माध्यम से कुपोषण को रोकने में मदद करेगा।
- बच्चों में कुपोषण की समस्या आहार में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी की वजह से होती है, जिससे शरीर का विकास बाधित हो जाता है।
