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इंटरनेशनल कोरल रीफ इनिशिएटिव (ICRI) ने ग्लोबल फंड फॉर कोरल रीफ्स (GFCR) और हाई-लेवल क्लाइमेट चैंपियंस (HLCC) की साझेदारी में कोरल रीफ ब्रेकथ्रू पहल की शुरुआत की है।इस पहल को वर्ष 2023 में आयोजित 37वें इंटरनेशनल कोरल रीफ इनिशिएटिव की आम बैठक में लॉन्च किया गया।

इंटरनेशनल कोरल रीफ इनिशिएटिव (ICRI)

  • यह राष्ट्रों और संगठनों के बीच एक वैश्विक साझेदारी है जो विश्व भर में प्रवाल भित्तियों एवं संबंधित पारिस्थितिकी प्रणालियों को संरक्षित करने का प्रयास करती है।
  • इस पहल की शुरुआत वर्ष 1994 में आठ देश की सरकारों द्वारा की गई थी जिसमें ऑस्ट्रेलिया, फ्राँस, जापान, जमैका, फिलीपींस, स्वीडन, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल थे।
  • इसकी घोषणा वर्ष 1994 में आयोजित जैव-विविधता पर अभिसमय के कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़ के पहले सम्मेलन में की गई थी।
  • ICRI से जुड़े संगठनों की संख्या 101 है, जिनमें 45 देश शामिल हैं (भारत उनमें से एक है)।

हाई-लेवल क्लाइमेट चैंपियंस (HLCC)

  • जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के लक्ष्यों का समर्थन करने में व्यवसायों, शहरों, क्षेत्रों और निवेशकों जैसे गैर-राज्य अभिकर्ताओं की भागीदारी को सुविधाजनक बनाने एवं बेहतर करने हेतु उन्हें संयुक्त राष्ट्र द्वारा नियुक्त किया जाता है।

ग्लोबल फंड फॉर कोरल रीफ्स (GFCR)

  • GFCR प्रवाल भित्ति पारिस्थितिकी प्रणालियों की सुरक्षा और पुनर्स्थापना के लिये कार्रवाई करने तथा संसाधन जुटाने हेतु एक वित्त साधन के रूप में कार्य करती है।
  • यह प्रवाल भित्तियों तथा उन पर निर्भर समुदायों को बचाने हेतु संधारणीय हस्तक्षेपों का समर्थन करने के लिये अनुदान और निजी पूंजी प्रदान करता है।
  • पारिस्थितिक, सामाजिक एवं आर्थिक प्रत्यास्थता प्रदान करने के लिये संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ, राष्ट्र, परोपकारी संसंस्थाएँ, निजी निवेशक और संगठन ग्लोबल फंड फॉर कोरल रीफ्स (प्रवाल भित्तियों के लिये वैश्विक कोष) गठबंधन में शामिल हो गए हैं।

कोरल रीफ ब्रेकथ्रू

  • कोरल रीफ ब्रेकथ्रू एक विज्ञान-आधारित पहल है, इसका उद्देश्य मानवता के भविष्य में प्रवाल भित्तियों के योगदान एवं उनके महत्त्व को ध्यान में रखते हुए राज्य और गैर-राज्य अभिकर्त्ताओं के सामूहिक प्रयासों से प्रवाल भित्तियों की सुरक्षा, संरक्षण एवं पुनर्स्थापना करना है।
  • 12 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश के साथ कोरल रीफ ब्रेकथ्रू पहल का लक्ष्य वर्ष 2030 तक कम से कम 125,000 वर्ग किलोमीटर में विस्तृत उष्णकटिबंधीय उथले जल वाले प्रवाल भित्तियों के अस्तित्त्व को बनाए रखना है, इस पहल से विश्व भर में लगभग 50 करोड़ से अधिक लोगों की अनुकूलन क्षमता में वृद्धि होगी।

यह पहल चार कार्य बिंदुओं पर आधारित है

कार्य बिंदु 1:

  • अत्यधिक मत्स्य पालन, विनाशकारी तटीय विकास और भूमि-आधारित स्रोतों से होने वाले प्रदूषण जैसे स्थानीय कारकों के प्रभाव को कम करना।

कार्य बिंदु 2:

  • प्रभावी संरक्षण के तहत प्रवाल भित्तियों का क्षेत्र दोगुना करना: 30 बाय 30 जैसे अंतर्राष्ट्रीय तटीय सुरक्षा लक्ष्यों के अनुरूप प्रवाल भित्तियों के संरक्षण हेतु अनुकूलन-आधारित प्रयासों को बढ़ावा देना।
  • 30 बाय 30 एक वैश्विक पहल है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक पृथ्वी की कम से कम 30% भूमि और महासागर क्षेत्र की रक्षा करना है। इसे UNCCD कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़ (COP 15) के दौरान प्रस्तावित किया गया था।

कार्य बिंदु 3:

  • बड़े पैमाने पर नवीन समाधानों को खोजना व जलवायु अनुकूल तंत्रों के विकास और कार्यान्वयन में सहायता करना, जिसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक 30% निम्नीकृत भित्तियों को सकारात्मक रूप से प्रभावित करना है।

कार्य बिंदु 4:

  • इन प्रमुख पारिस्थितिक तंत्रों को संरक्षित और पुनर्स्थापित करने के लिये सार्वजनिक व निजी स्रोतों से वर्ष 2030 तक कम से कम 12 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश सुरक्षित करना।
  • कोरल ब्रेकथ्रू के लक्ष्यों को पूरा करने से सतत् विकास लक्ष्यों (SDGs), विशेष रूप से SDG14 (जल के नीचे जीवन/Life Below Water) को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

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