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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों का विश्लेषण करने वाली एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2022 से सितंबर 2023 तक देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में दिल्ली शीर्ष पर है।यहां प्रति घन मीटर में पीएम 2.5 की सांद्रता 100.01 माइक्रोग्राम रही जो सरकार द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा का तीन गुना है।

प्रमुख बिंदु

  • दिल्ली भारत के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक है। वायु गुणवत्ता में थोड़ा सुधार जलवायु संबंधी कारकों जैसे-बारिश, हवा के कारण आया है लेकिन अब भी दिल्ली प्रदूषित शहरों की लिस्ट में टॉप पर है।
  • दिल्ली के अलावा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के चार और शहर – फरीदाबाद (89 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर), नोएडा (79.1 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर), गाजियाबाद (78.3 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) और मेरठ (76.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) – भी शीर्ष 10 सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हैं।

प्रदूषित शहरों में पटना दूसरे नंबर पर

  • विश्लेषण से पता चला कि इस अवधि में पटना 99.7 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की औसत पीएम 2.5 सांद्रता के साथ दूसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। पटना में पिछले वर्ष की तुलना में वायु गुणवत्ता में 24 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।
  • रिपोर्ट में बताया गया है कि शीर्ष सात प्रदूषित शहर – दिल्ली, पटना, मुजफ्फरपुर, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ हैं यह सभी सिंधु-गंगा के मैदानी इलाकों का हिस्सा हैं।

क्या है रिपोर्ट में

  • यह रिपोर्ट 1 अक्टूबर, 2022 से 30 सितंबर, 2023 तक सरकार के पीएम2.5 डेटा के विश्लेषण पर आधारित है और राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत शामिल किए गए शहरों पर केंद्रित है।
  • इस कार्यक्रम का लक्ष्य 2026 तक पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) में 40 प्रतिशत की कमी हासिल करना है।

देश में सबसे स्वच्छ वायु

  • क्लाइमेट ट्रेंड्स और प्रौद्योगिकी फर्म रेस्पिरर लिविंग साइंसेज द्वारा किए गए विश्लेषण से पता चला है कि आइजोल और मिजोरम में पीएम 2.5 स्तर केवल 11.1 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर के साथ वहां सबसे साफ सुथरी हवा/वायु है।

वायु प्रदूषण को कम करने में सरकार द्वारा किये गए प्रयास

  • सरकार द्वारा वायु प्रदूषण को कम करने में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना या दिल्ली के आसपास परिधीय राजमार्गों, हाइपरलोकल विकास जैसे उपाय सकारात्मक कार्य हैं।

निष्कर्ष

  • एयरशेड दृष्टिकोण के माध्यम से वायु गुणवत्ता के मुद्दों को निरंतर तरीके से संबोधित करने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

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