- चिकित्सा के क्षेत्र में कैटालिन कारिको और ड्रयू वीसमैन को 2023 का नोबेल पुरस्कार मिला है। दोनों वैज्ञानिकों को ये पुरस्कार COVID-19 के खिलाफ उनकी खोज के लिए दिया गया है।
- उनकी खोज की मदद से Covid-19 के खिलाफ एमआरएनए (mRNA) वैक्सीन का विकास संभव हो पाया।इसे फाइजर, बायो एन टेक और मॉडर्ना ने बनाया था
- नोबेल प्राइज में 11 मिलियन स्वीडिश क्रोनर यानी लगभग 8 करोड़ रुपए का कैश प्राइज दिया जाएगा। यह राशि 10 दिसंबर को विजेताओं को दी जाएगी।
- इस साल अलग-अलग क्षेत्रों में नोबेल प्राइज के लिए 351 उम्मीदवार हैं। 1901 में जब नोबेल प्राइज की शुरुआत हुई थी, तब से 2023 तक मेडिसिन की फील्ड में 227 लोगों को इससे सम्मानित किया जा चुका है।
कैटलिन कारिकोः जिन्होंने mRNA टेक्नोलॉजी बनाई
- कैटलिन कारिको का जन्म 17 अक्टूबर 1955 को हंगरी में हुआ। कारिको ने कई सालों तक हंगरी की सेज्ड यूनिवर्सिटी में RNA पर काम किया।
- कैटलिन कारिको ने 1980 में RNA टेक्नोलॉजी पर PHD भी की।
- 1985 में उन्होंने अपनी कार ब्लैक मार्केट में 1200 डॉलर में बेच दी और अमेरिका आ गईं। यहां आकर उन्होंने पेन्सिल्वेनिया यूनिवर्सिटी में mRNA टेक्नोलॉजी पर काम शुरू किया।
- mRNA की खोज तो 1961 में हो गई थी, लेकिन अब भी वैज्ञानिक इसके जरिए ये पता लगाने की कोशिश कर रहे थे कि इससे शरीर में प्रोटीन कैसे बन सकता है ।
ड्रू वीसमैन ने फंडिंग कर सहारा दिया
- ड्रू मशहूर इम्युनोलॉजिस्ट हैं। ड्रू ने कारिको को फंडिंग की। बाद में दोनों ने पार्टनरशिप करके इस टेक्नोलॉजी पर काम शुरू किया।
- 2005 में ड्रू और कारिको ने एक रिसर्च पेपर छापा, जिसमें दावा किया कि मॉडिफाइड mRNA के जरिए इम्युनिटी बढ़ाई जा सकती है, जिससे कई बीमारियों की दवा और वैक्सीन भी बन सकती है।
- हालांकि उनके इस रिसर्च पर कई सालों तक किसी ने ध्यान नहीं दिया। 2010 में अमेरिकी वैज्ञानिक डैरिक रोसी ने मॉडिफाइड mRNA से वैक्सीन बनाने के लिए बायोटेक कंपनी मॉडर्ना खोली।
- 2013 में कारिको को जर्मन कंपनी बायोएनटेक में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अपॉइंट किया गया था।
mRNA टेक्नोलॉजी
- mRNA या मैसेंजर-RNA जेनेटिक कोड का एक छोटा सा हिस्सा है, जो हमारी सेल्स (कोशिकाओं) में प्रोटीन बनाती है।
- इसे आसान भाषा में ऐसे भी समझ सकते हैं कि जब हमारे शरीर पर कोई वायरस या बैक्टीरिया हमला करता है, तो mRNA टेक्नोलॉजी हमारी सेल्स को उस वायरस या बैक्टीरिया से लड़ने के लिए प्रोटीन बनाने का मैसेज भेजती है।
- इससे हमारे इम्यून सिस्टम को जो जरूरी प्रोटीन चाहिए, वो मिल जाता है और हमारे शरीर में एंटीबॉडी बन जाती है।
- इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि इससे कन्वेंशनल वैक्सीन के मुकाबले ज्यादा जल्दी वैक्सीन बन सकती है। इसके साथ ही इससे शरीर की इम्युनिटी भी मजबूत होती है।
