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भारत के 22वें विधि आयोग ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसमें एफआईआर (प्रथम सूचना रिपोर्ट) के ऑनलाइन पंजीकरण की अनुमति देने के लिए आपराधिक प्रक्रिया संहिता 1973 (CrPC) की धारा 154 में संशोधन करने का सुझाव दिया ।

भारत के गृह मंत्रालय ने विधि आयोग से जून 2018 को ऑनलाइन एफआईआर पंजीकरण को सक्षम बनाने के लिए आपराधिक प्रक्रिया संहिता 1973 (सीआरपीसी) की धारा 154 में संशोधन की व्यवहार्यता का अध्ययन करने का अनुरोध किया गया था।आयोग ने संदर्भ की जांच की और 27 सितंबर 2023 को अपनी रिपोर्ट संख्या 282 विधि एवं न्याय मंत्रालय, विधि कार्य विभाग को प्रस्तुत की।

विधि आयोग की सिफ़ारिशें

  • विधि आयोग के अनुसार ई-एफआईआर का पंजीकरण चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए।
  • ई-एफआईआर की शुरुआत तीन साल तक की कैद की सजा वाले अपराधों से की जा सकती है।
  • सभी गैर-संज्ञेय अपराधों के लिए ई-शिकायत की अनुमति दी जा सकती है।
  • लॉ कमीशन ने सरकार को ई-एफआईआर के रजिस्ट्रेशन की सुविधा के लिए एक राष्ट्रीय पोर्टल बनाने का भी सुझाव दिया है।
  • रिपोर्ट में ई-एफआईआर दर्ज कराने वाले व्यक्ति द्वारा ई-वेरिफिकेशन और अनिवार्य घोषणा का सुझाव भी दिया गया, ताकि इसका दुरुपयोग न हो।
  • ई-शिकायतों या ई-एफआईआर के गलत पंजीकरण के लिए कारावास और जुर्माने की न्यूनतम सजा दी जानी चाहिए, जिसके लिए आईपीसी की धाराओं में संशोधन किया जा सकता है।
  • ई-शिकायतों या ई-एफआईआर के गलत पंजीकरण से बचने के लिए शिकायतकर्ता का वेरिफिकेशन ई-प्रमाणीकरण तकनीकों का उपयोग करके किया जा सकता है ।

विधि आयोग

  • भारत का विधि आयोग एक गैर-सांविधिक निकाय है।
  • विधि आयोग को कानून के क्षेत्र में अनुसंधान करने के लिए एक निश्चित समय सीमा के साथ गठित किया गया है।
  • आयोग विचारार्थ विषयों के अनुसार सरकार को सिफारिशें करता है।
  • आयोग का प्रमुख कार्य कानून के शासन के तहत समाज में अधिकतम न्याय प्रसार और भारत में सुशासन को बढ़ावा देने के लिए कानूनी सिफारिशें करना।
  • 1833 के चार्टर एक्ट के तहत लॉर्ड मैकाले की अध्यक्षता में प्रथम विधि आयोग का गठन वर्ष 1834 में किया गया था

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