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वैज्ञानिकों ने स्टेम सेल और रसायनों का उपयोग करके प्रयोगशाला में “मानव भ्रूण” मॉडल विकसित कर एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है, जो प्रारंभिक भ्रूण विकास पर प्रकाश डालती है।इज़रायल के शोधकर्ताओं ने 14 दिन के मानव भ्रूण का एक मॉडल बनाने हेतु स्टेम सेल और रसायनों के संयोजन का उपयोग किया।स्टेम सेल और रसायनों का यह मिश्रण भ्रूण जैसी संरचना निर्माण का एक महत्त्वपूर्ण आरंभिक बिंदु था।इज़रायली शोधकर्ताओं का यह मॉडल सहज रूप से विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं को एकत्रित  करने में सक्षम था, जो कि भ्रूण का निर्माण करती हैं, भ्रूण को पोषक तत्त्व प्रदान करती हैं, शरीर का  विकास सुनिश्चित करती हैं और भ्रूण को सहारा देने के लिये प्लेसेंटा एवं गर्भनाल जैसी संरचनाएँ बनाती हैं।यह विधि विशेष रूप से प्रभावी नहीं रही क्योंकि स्टेम कोशिकाओं के संयोजन का केवल 1% ही सहज रूप से एकत्रित हो पाया जो कि बेहतर दक्षता की आवश्यकता को दर्शाती है।

मॉडल से प्रारंभिक विकास के बारे में जानकारी

  • मॉडल डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड (DNA) दोहराव और गुणसूत्र वितरण में त्रुटियों को उजागर करने में मदद करते हैं।
  • शोधकर्ताओं ने पाया कि DNA दोहराव की असामान्यताएँ प्रक्रिया के आरंभ में होती हैं, जो कोशिका विभाजन को प्रभावित करती हैं।
  • ये मॉडल भ्रूण के विकास में जीन के कार्यों और उनकी भूमिकाओं का अध्ययन करने में सक्षम बनाते हैं।

भ्रूण मॉडल और अनुसंधान का महत्त्व

  • गर्भाशय में प्रत्यारोपित होने के बाद प्रारंभिक भ्रूण विकास का अध्ययन करना नैतिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है।
  • इन प्रारंभिक चरणों के दौरान अनुसंधान महत्त्वपूर्ण होता है क्योंकि अधिकांश गर्भपात और जन्म दोष इसी अवधि में होते हैं।
  • सामान्य भ्रूण विकास और आनुवंशिक कारकों को समझने से इनविट्रो निषेचन परिणामों में सुधार हो सकता है।
  • यह शोधकर्ताओं को भ्रूण के विकास पर आनुवंशिक, पश्चजात (Epigenetic) और पर्यावरणीय प्रभावों को समझने में सहायता करता है।

 क्या लैब-विकसित भ्रूण का उपयोग गर्भावस्था के लिये किया जा सकता है

  • नहीं, ये मॉडल केवल प्रारंभिक भ्रूण विकास का अध्ययन करने के लिये हैं।
  • ये सामान्यतः 14 दिनों के बाद नष्ट हो जाते हैं और प्रत्यारोपण की अनुमति नहीं होती है।
  • वर्ष 1979 में यूके में 14 दिन की सीमा प्रस्तावित की गई थी, जो प्राकृतिक भ्रूण प्रत्यारोपण के समाप्त होने की अवधि के बराबर थी।
  • यह उस बिंदु को चिह्नित करता है जब कोशिकाएँ एक “एकल भ्रूण” का निर्माण शुरू कर देती हैं और युग्म में इनका विखंडन संभव नहीं हो पाता है।
  • भ्रूण के कोशिकाओं के समूहों के विकास के साथ ही इसके संबंध में नैतिक चिंताओं (Ethical Considerations) में परिवर्तन शुरू हो जाता है।
  • नैतिक चिंताएँ तब होती हैं जब यह कोशिकाओं का एक समूह होता है और जब यह भ्रूण बन जाता है तो प्रायः प्रिमिटिव स्ट्रीक के रूप में संदर्भित किया जाता है।
  • प्रिमिटिव स्ट्रीक एक रेखीय संरचना है जो भ्रूण में दिखाई देती है, यह रेडियल समरूपता (डिंब की तरह) से हमारे शरीर की द्विपक्षीय समरूपता (बाएँ एवं दाएँ हाथ और पैरों द्वारा चिह्नित) में परिवर्तन को चिह्नित करती है।

मानव भ्रूण

  • मानव भ्रूण निषेचन से लेकर गर्भधारण के आठवें सप्ताह के अंत तक एक विकासशील मानव होता है।
  • मानव भ्रूण के विकास के तीन मुख्य चरण होते हैं: पूर्व-प्रत्यारोपण चरण, आरोपण चरण और ऑर्गोजेनेसिस चरण।
  • मानव भ्रूण विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं से बना होता है जो विभिन्न ऊतकों और अंगों में विभेदित होते हैं।
  • मानव भ्रूण सामान्यतः महिला प्रजनन पथ या प्रयोगशाला में मानव शुक्राणु द्वारा मानव अंडे (Oocyte) के निषेचन द्वारा बनाया जाता है।

स्टेम सेल

  • स्टेम सेल एक ऐसी कोशिका है जिसमें शरीर में विशेष प्रकार की कोशिकाओं में विकसित होने की अद्वितीय क्षमता होती है।
  • भविष्य में इनका उपयोग उन कोशिकाओं और ऊतकों को बदलने के लिये किया जा सकता है जो बीमारी के कारण क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गए हैं।

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