मुंबई में आयोजित ANUTEC – इंटरनेशनल फूडटेक इंडिया के 17वें संस्करण में उद्योग और सरकार की प्रमुख हस्तियों ने भारत में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला। भारत इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की राह पर है और यह देश की अर्थव्यवस्था के प्रमुख चालकों में से एक बनने के लिये तत्पर है।
खाद्य प्रसंस्करण
- खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र समग्र खाद्य आपूर्ति शृंखला का एक महत्त्वपूर्ण घटक है।
- इसमें कच्चे कृषीय और पशुधन उत्पादों को उपभोग के लिये उपयुक्त प्रसंस्कृत व मूल्यवर्द्धित खाद्य उत्पादों में परिवर्तित किया जाता है।
- इस क्षेत्र में गतिविधियों, प्रौद्योगिकियों और प्रक्रियाओं की एक विस्तृत शृंखला शामिल है जिसका उद्देश्य खाद्य उत्पादों को सुरक्षित, अधिक सुविधाजनक और लंबे समय तक टिकाउ बनाने के साथ-साथ उनके स्वाद एवं पोषण मूल्य में वृद्धि करना है।
भारत में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र
- खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र का भारत की अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण योगदान है, इसका निर्यात में 13% और औद्योगिक निवेश में 6% का योगदान है।
- इस क्षेत्र ने पर्याप्त प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investments- FDI) को आकर्षित किया है, जिससे वर्ष 2014 से 2020 तक 4.18 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश हुआ है, जो इस क्षेत्र की आगामी संभावनाओं का संकेत है।
- इससे वर्ष 2024 तक 9 मिलियन रोज़गार उत्पन्न होने की उम्मीद है। इसके अलावा वर्ष 2030 तक भारत विश्व का पाँचवाँ सबसे बड़ा खाद्य और खाद्य प्रौद्योगिकी उपभोक्ता बनने के लिये तैयार है, क्योंकि घरेलू खपत चौगुनी हो जाएगी।
- यह इस क्षेत्र की अपार विकास क्षमता को रेखांकित करता है।
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से संबंधित सरकारी पहल
- अप्रैल 2015 में प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (Priority Sector Lending- PSL) मानदंडों के तहत कृषि गतिविधि के रूप में खाद्य और कृषि आधारित प्रसंस्करण इकाइयों और कोल्ड चेन को शामिल करना।
- व्यवसाय करने में सुगमता की दिशा में एक उपाय के रूप में वर्ष 2016 में अधिसूचनाओं के माध्यम से भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा उत्पाद-दर-उत्पाद अनुमोदन को एक घटक और योजक-आधारित अनुमोदन प्रक्रिया में स्थानांतरित करना।
- खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिये स्वचालित मार्ग के तहत 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की स्वीकृति।
- राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) के साथ 2000 करोड़ रुपए का विशेष खाद्य प्रसंस्करण कोष स्थापित करना।
