भारतीय वन्यजीव संस्थान की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि असम के होलोंगापार गिब्बन अभयारण्य, का संपर्क आसपास के वन क्षेत्रों से टूट गया है जिससे यह एक वन द्वीप बन गया है।यह रिपोर्ट देहरादून स्थित डब्ल्यूआईआई के रोहित रवींद्र समिता झा और गोपी गोविंदन वीरस्वामी, असम स्थित जैव विविधता संरक्षण समूह आरण्यक के दिलीप छेत्री और असम के पर्यावरण और वन विभाग के नंदा कुमार द्वारा प्रस्तुत किया गया हैं।रिपोर्ट में गुवाहाटी प्राइमेटोलॉजिस्ट्स ने 1.65 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक का मार्ग बदलने का सुझाव दिया है, जिसने पश्चिमी हूलॉक गिब्बन ( हूलॉक-हूलॉक ) को समर्पित पूर्वी असम अभयारण्य को दो असमान भागों में विभाजित कर दिया है। हूलोंगापार गिब्बन अभयारण्य, जिसे पहले गिब्बन वन्यजीव अभयारण्य के नाम से जाना जाता है, भारत के असम के जोरहाट ज़िले में स्थित है।वर्ष 1997 में स्थापित यह एक समृद्ध जैवविविधता है, जिसमें भारत के एकमात्र गिब्बन, पश्चिमी हूलॉक और बंगाल स्लो/धीमा लोरिस, पूर्वोत्तर भारत में रात्रिचर प्राइमेट शामिल हैं।
हूलॉक गिब्बन के विषय में मुख्य तथ्य
- गिब्बन दक्षिण-पूर्व एशिया के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय जंगलों में पाए जाते हैं तथा इन्हें सभी वानरों में सबसे छोटे एवं समझदार वानरों के रूप में भी जाना जाता है।
- इनमें अन्य वानरों के समान तीष्ण बुद्धि, विशिष्ट व्यक्तित्व और मज़बूत पारिवारिक बंधन होते हैं।
- ये विश्व भर में पाई जाने वाली 20 गिब्बन प्रजातियों में से एक का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- हूलॉक गिब्बन भारत की एकमात्र वानर प्रजाति है।
भारत में गिब्बन प्रजातियाँ
पश्चिमी हूलॉक गिब्बन
- ये पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिण और दिबांग नदी के पूर्व क्षेत्र के बीच सीमित हैं। भारत के बाहर यह पूर्वी बांग्लादेश तथा उत्तर-पश्चिम म्याँमार में पाया जाता है।
- IUCN रेड लिस्ट: संकटग्रस्त
पूर्वी हूलॉक गिब्बन
- यह भारत में अरुणाचल प्रदेश और असम के विशिष्ट इलाकों में और भारत के बाहर दक्षिणी चीन तथा उत्तर-पूर्व म्याँमार में पाया जाता है।
- IUCN लाल सूची: असुरक्षित
- भारत में दोनों प्रजातियाँ भारतीय (वन्यजीव) संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची 1 में सूचीबद्ध हैं।
विशेषताएँ
- वे अपनी विशिष्ट सफेद भौंहों, लंबी भुजाओं और स्वरों के उच्चारण के लिये उपयोग की जाने वाली गले की थैली के लिये जाने जाते हैं।
वृक्षीय जीवनशैली
- गिब्बन विशेष रूप से वृक्षवासी होते हैं, जो उष्णकटिबंधीय जंगलों में पेड़ों की चोटी पर अपना जीवन बिताते हैं।
चुनौतियाँ
- हूलॉक गिब्बन विशेष रूप से आवास संबंधी व्यवधानों, जैसे कि कैनोपी गैप (Canopy Gaps) के प्रति संवेदनशील होते हैं।
- आवास के विखंडन के कारण उनका आनुवंशिक अलगाव हो सकता है और उनकी आबादी को खतरा हो सकता है।
संरक्षण के प्रयास
- आर्टिफीसियल कैनोपी ब्रिज जैसी पहल का उद्देश्य संरक्षण प्रयासों को सुनिश्चित कर उनकी आनुवंशिक विविधता को संरक्षित करना है।
- गिब्बन कैनोपी के माध्यम से यात्रा करते समय बीजों को फैलाकर वन पारिस्थितिकी तंत्र में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- उनके आवासों के स्वास्थ्य और जैवविविधता को बनाए रखने के लिये उनका संरक्षण आवश्यक है।
