चीन और भूटान ने सीमा निर्धारण पर ध्यान केंद्रित करते हुए बीजिंग में 13वीं विशेषज्ञ समूह बैठक आयोजित की।दोनों देशों का लक्ष्य सीमा के समाधान में तेज़ी लाना है, इसलिये यह कदम भारत सहित व्यापक क्षेत्रीय संदर्भ पर प्रभाव डालता है।
13वीं विशेषज्ञ समूह बैठक की मुख्य विशेषताएँ
- दोनों देशों ने विवादित सीमा का समाधान प्राप्त करने की दिशा में प्रयासों में तेज़ी लाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
- उत्साहजनक गति बनाए रखने के लिये आगामी 14वें दौर की सीमा वार्ता के लिये योजनाएँ बनाई गईं।
- बैठक में तीन-चरणीय रोडमैप के कार्यान्वयन पर चर्चा की गई, जो सीमा समझौता वार्ता में तेज़ी लाने के लिये उल्लिखित रणनीति का पालन करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
चीन-भूटान संबंधों में हालिया घटनाक्रम भारत के लिये चिंता का विषय
- चीन और भूटान संबंधों पर हालिया घटनाक्रम भारत के रणनीतिक हितों को प्रभावित कर सकते हैं, विशेषकर डोकलाम ट्राई-जंक्शन वह बिंदु है, जहाँ भारत, भूटान और चीन की सीमाएँ मिलती हैं।
- चीन ने भूटान के पूर्वी क्षेत्र, जिसे साकटेंग (वन्यजीव अभयारण्य) के नाम से जाना जाता है, पर भी अपना दावा किया है, जो भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश की सीमा से लगता है।
- अरुणाचल प्रदेश पर चीन अपना अधिकार मानता है और इसे “दक्षिण तिब्बत” कहता है। साकटेंग पर चीन के दावे को सीमा मुद्दे पर भूटान को अपनी शर्तों को स्वीकार करने के लिये मज़बूर करने के साथ-साथ अरुणाचल प्रदेश पर भारत की संप्रभुता को चुनौती देने के लिये दबाव की रणनीति के रूप में देखा जा सकता है।
- इस क्षेत्र में भूटान भारत के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक है और भारत ने लंबे समय से भूटान को आर्थिक एवं सैन्य सहायता प्रदान की है। हालाँकि हाल के कुछ वर्षों में चीन ने भूटान के साथ अपने आर्थिक तथा राजनयिक संबंधों में वृद्धि की है, जो संभावित रूप से भूटान में भारत के प्रभाव को कमज़ोर कर सकता है।
भूटान के साथ भारत के संबंध
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध
- भारत और भूटान बौद्ध धर्म, हिंदू धर्म और अन्य परंपराओं में निहित समान सांस्कृतिक विरासत साझा करते हैं।
- कई भूटानी तीर्थयात्री बोधगया, राजगीर, नालंदा, सिक्किम, उदयगिरि और भारत के अन्य बौद्ध स्थलों की यात्रा करते रहे हैं।
- भूटान वर्ष 1947 में भारत की संप्रभुता और स्वतंत्रता को मान्यता देने वाले पहले देशों में से एक था और तब से इसके विकास तथा आधुनिकीकरण का समर्थन करता रहा है।
सामरिक एवं सुरक्षा सहयोग
- भारत और भूटान ने शांति स्थापित करने तथा एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने के लिये वर्ष 1949 में मित्रता संधि पर हस्ताक्षर किये, जिसे वर्ष 2007 में संशोधित किया गया।
- भारत ने भूटान को रक्षा, बुनियादी ढाँचे और संचार जैसे क्षेत्रों में सहायता प्रदान की है ताकि भूटान अपनी संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने में सक्षम हो।
- वर्ष 2017 में भारत और चीन के बीच डोकलाम गतिरोध के दौरान भूटान ने चीनी घुसपैठ का मुकाबला करने के लिये भारतीय सैनिकों को अपने क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति देकर एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
आर्थिक एवं विकास साझेदारी
- व्यापार, वाणिज्य और पारगमन पर भारत-भूटान समझौता (1972 में हस्ताक्षरित और 2016 में संशोधित) दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार व्यवस्था स्थापित करता है।
- भारत भूटान का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। भारत भूटान के सामाजिक-आर्थिक विकास, विशेष रूप से कृषि, सिंचाई, बुनियादी ढाँचे, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्रों में आर्थिक सहायता प्रदान करता है।
- भूटान के लिये भारत पेट्रोल-डीज़ल, यात्री कारें, चावल, लकड़ी का कोयला, सेलफोन, सोयाबीन तेल, उत्खनन उपकरण, विद्युत जनरेटर और मोटर, टर्बाइन के हिस्से तथा परिवहन वाहन आदि का शीर्ष निर्यातक है।
- भारत भूटान से बिजली, सुपारी, संतरे, लोहे या गैर-मिश्र धातु इस्पात के अर्द्ध-निर्मित उत्पाद, बोल्डर आदि का शीर्ष आयातक है।
- भारत भूटान में प्रमुख निवेशक भी है, जिसमें देश के कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का 50% शामिल है।
