भारत के चंद्रयान-3 मिशन के लैंडर मॉड्यूल ने 23 अगस्त की शाम को इतिहास रचते हुए चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग की थी. इसका रोवर अब चांद पर घूम रहा है.चंद्रयान-3 के रोवर ‘प्रज्ञान’ ने चांद पर पहली बाधा पार कर ली है। प्रज्ञान के सामने 100mm का गड्ढा आया जिसे उसने आराम से नेगोशिएट कर लिया।
प्रज्ञान रोवर
- चंद्रमा की सतह पर भ्रमण करने और आंकड़े एकत्र करने वाला एक रोवर है जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) चंद्रयान-3 मिशन के तहत चन्द्रमा पर उतारा है।
- रोवर का पिछला संस्करण 22 जुलाई 2019 को चंद्रयान -2 के हिस्से के रूप में छोड़ा गया था और 6 सितंबर को चंद्रमा पर दुर्घटनाग्रस्त होने पर इसके लैंडर विक्रम के साथ नष्ट हो गया था।
- 14 जुलाई 2023 को विक्रम और प्रज्ञान को नए संस्करण चंद्रयान-3 के साथ लॉन्च किया गया, जो 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफलतापूर्वक उतरा।
चंद्रयान-3 के रोवर प्रज्ञान में 2 पेलोड
- LASER Induced Breakdown Spectroscope (LIBS)
- Alpha Particle X-ray Spectrometer (APXS)
रोवर प्रज्ञान में लगे उपकरणों का क्या है काम
- LIBS: यह हाई एनर्जी वाली लेजर किरणों को चंद्रमा की सतह पर छोड़ेगा। इससे चांद की सतह के केमिकल कम्पोजीशन का पता चलेगा।
- APXS: यह चांद के केमिकल स्ट्रक्चर के बारे में बताएगा। मतलब चांद पर कौन-कौन से तत्व मौजूद हैं, यह इससे पता चलेगा।
चंद्रयान-3 के प्रपल्शन मॉड्यूल में एक पेलोड
- Spectro-polarimetry of HAbitable Planet Earth (SHAPE)
SHAPE का काम
- SHAPE :पृथ्वी से आने वाली रोशनी और तरंगों की स्टडी करेगा। फिर बाकी ग्रहों का एनालिसिस करेगा और बताएगा कि क्या उसे वहां जीवन की कोई संभावना नजर आ रही है।
लैंडर मॉड्यूल में लगे उपकरण क्या करेंगे
- RAMBHA: यह चांद की सतह के प्लाज्मा (आयनों और इलेक्ट्रॉनों) के घनत्व और समय के साथ इसके परिवर्तनों को मापने के लिए है। चूंकि चंद्रमा के पास न तो अपना वायुमंडल है, न चुंबकीय क्षेत्र, ऐसे में वहां प्लाज्मा सूर्य से आता है। लैंडर में लगा यह छड़नुमा उपकरण चंद्रमा पर किसी तरह के रेडिएशन की मौजूदगी के बारे में बताएगा।
- ChaSTE: चंद्रमा ध्रुवीय क्षेत्र के निकट चंद्र सतह के तापीय गुणों को मापने के लिए। सीधे शब्दों में, चांद का तापमान कितना है, कितना उतार-चढ़ाव होता है। इस उपकरण के एक सिरे में चंद्रमा की सतह में धंसाया जाएगा, ठीक उसी तरह जैसे मुंह में थर्मामीटर लगाते हैं। फिर यह चंद्रमा की सतह पर गर्मी के प्रभाव को भी मापेगा।
- ILSA: लैंडिंग स्थल के आसपास भूकंप से जुड़ी गतिविधियों को नापेगा। यह लैंडर से बाहर निकलकर स्टडी करेगा मगर मूवमेंट नहीं करेगा। इसे एक केबल के जरिए विक्रम से कनेक्ट रखा गया है।
- LRA: यह एक पैसिव एक्सपेरिमेंट है जो मून सिस्टम की डायनैमिक्स पर स्टडी करेगा। यह NASA का लेजर रिफ्लेक्टर है। इसकी मदद से चंद्रमा और धरती के बीच की सटीक दूरी मापी जा सकेगी।
चंद्रयान-3 का प्रज्ञान रोवर का प्रोसेस
- चंद्रयान-3 के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने बताया कि प्रज्ञान को चांद की सतह पर पॉइंट A से B तक मूव कराने में कई स्टेप्स होते हैं।
- हर रास्ते की प्लानिंग के लिए ऑनबोर्ड कैमरा का डेटा बेंगलुरु के ISRO कंट्रोल सेंटर में डाउनलोड किया जाना चाहिए।
- इस डेटा से डिजिटल एलिवेशन मॉडल (DEM) बनाया जाता है। फिर ग्राउंड और मैकेनिज्म टीम तय करती है कि कौन सा रास्ता लेना है और रोवर को फॉलो करने के लिए कमांड देता है।
- वीरमुथुवेल ने कहा कि रोवर मूवमेंट की कुछ सीमाएं हैं। हर बार नेविगेशन कैमरा जो तस्वीर भेजता है, उनसे अधिकतम पांच मीटर तक का DEM बनाया जा सकता है।
- इसका मतलब यह कि जब भी रोवर को चलने का कमांड दिया जाता है, तो वह अधिकतम पांच मीटर की दूरी ही तय कर सकता है।
- वीरमुथुवेल ने बताया कि रोवर के सामने तमाम बाधाओं आदि की चुनौतियां हैं। उन्होंने क हाहम पहले क्रेटर को लेकर बहुत चिंतित थे, लेकिन उस बाधा को दूर कर लिया गया है।
