Wed. Jun 24th, 2026
  • केंद्र सरकार ने भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) के निदेशकों की नियुक्ति और हटाने और जांच शुरू करने में खुद को महत्वपूर्ण भूमिका देने के लिए संसद में एक विधेयक लाया है।जिसका उद्देश्य भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) अधिनियम 2017 में आईआईएम को सौंपी गई कुछ शक्तियों को रद्द करना है।

2023 विधेयक के प्रावधान

  • 2017 के अधिनियम में महतवपूर्ण नियुक्तियों और निर्णयों को लेने का अधिकार, आईआईएम के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के पास था । वहीँ भारतीय प्रबंध संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2023 के अनुसार, भारत के राष्ट्रपति प्रत्येक संस्थान के विजिटर होंगे।
  • ‘‘विज़िटर किसी भी संस्थान के काम और प्रगति की समीक्षा करने, उसके मामलों की जांच करने और विज़िटर द्वारा निर्देशित तरीके से रिपोर्ट करने के लिए एक या एक से अधिक व्यक्तियों को नियुक्त कर सकते हैं। बोर्ड विज़िटर को उस संस्थान के खिलाफ उचित समझे जाने वाली जांच की सिफारिश भी कर सकता है, जो अधिनियम के प्रावधानों और उद्देश्यों के अनुसार काम नहीं कर रहा है।’’
  • रिपोर्टों से पता चलता है कि प्रश्नों और सुझावों के प्रति आईआईएम की प्रतिक्रिया की कमी को लेकर सरकार का असंतोष इस संशोधन के पीछे एक प्रेरक शक्ति है। हालाँकि, आईआईएम प्रणाली के भीतर हालिया उथल-पुथल से संबंधित गहरी चिंताएँ हैं, जिनमें आईआईएम अहमदाबाद, आईआईएम कलकत्ता और आईआईएम रोहतक के मुद्दे भी शामिल हैं। कुछ अन्य आईआईएम के निदेशकों पर सत्ता के दुरुपयोग और एमबीए पाठ्यक्रम की फीस में मनमानी वृद्धि के आरोपों का भी सामना करना पड़ा है।

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