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पृथ्वी के वायुमंडल में मीथेन के स्तर में वृद्धि के कारण पृथ्वी पर होने वाले जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंता और  अधिक बढ़ गई है।मीथेन, जो कि एक प्रमुख ग्रीनहाउस गैस है, की निरंतर वृद्धि को देखते हुए सवाल उठता है कि क्या पृथ्वी पिछले जलवायु परिवर्तनों के समान ‘टर्मिनेशन लेवल ट्रांज़िशन (पृथ्वी की जलवायु में एक स्थिति से दूसरी स्थिति में महत्त्वपूर्ण और तीव्र बदलाव अथवा समाप्ति-स्तर का संक्रमण)’ का सामना कर रही है।

मीथेन

  • मीथेन सबसे सरल हाइड्रोकार्बन (Hydrocarbon) है, जिसमें एक कार्बन परमाणु तथा चार हाइड्रोजन परमाणु (CH4) होते हैं।
  • यह ज्वलनशील है तथा इसे पूरे विश्व में ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है।
  • मीथेन एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस (Greenhouse Gas) है।
  • वायुमंडल में अपने जीवन काल के पहले 20 वर्षों में मीथेन की गर्म करने की क्षमता कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में 80 गुना अधिक है।
  • मीथेन उत्सर्जन का लगभग 60 फीसदी हिस्सा जीवाश्म ईंधन के उपयोग, खेती, लैंडफिल और अपशिष्ट से आता है। शेष प्राकृतिक स्रोतों, विशेष रूप से उष्णकटिबंधीय तथा उत्तरी आर्द्रभूमि में सड़ने वाली वनस्पति से है।

टर्मिनेशन लेवल ट्रांज़िशन

  • “समाप्ति-स्तर का संक्रमण” की अवधारणा से आशय पृथ्वी की जलवायु में एक स्थिति से दूसरी स्थिति  में एक महत्त्वपूर्ण और अचानक बदलाव से है।
  • विभिन्न जलवायवीय कारकों में तीव्र और पर्याप्त परिवर्तन इन संक्रमणों की पहचान है, इन परिवर्तनों के पृथ्वी के पारिस्थितिक तंत्र, मौसम के पैटर्न तथा समग्र पर्यावरणीय स्थिरता पर दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।
  • अपने संपूर्ण इतिहास में पृथ्वी की जलवायु ने विभिन्न समाप्ति-स्तर के संक्रमणों का सामना किया है।
  • समुद्री धाराओं में परिवर्तन एवं वायुमंडलीय संरचना सहित विभिन्न कारक इस समाप्ति-स्तर के संक्रमण को और अधिक गति प्रदान कर सकते हैं।
  • वैश्विक शीतलन अथवा हिमयुग की सबसे हालिया घटनाएँ प्लेइस्टोसिन काल के दौरान हुईं, जो लगभग 2.6 मिलियन से 11,700 वर्ष पहले तक देखी गई थीं। ये अक्सर हिमयुग के अंत तथा उसके बाद ऊष्म अंतर-हिमनद काल (Interglacial Periods) में संक्रमण से संबंधित हैं।

ग्लोबल वार्मिंग पर मीथेन का खतरा

ग्रीनहाउस गैस के रूप में मीथेन

  • मीथेन गैस कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) की तुलना में ऊष्मा को रोके रखने में अधिक सक्षम है।
  • CO₂ के दीर्घकालिक जीवनकाल की तुलना में इसका वायुमंडलीय जीवनकाल एक दशक से भी कम होता है।
  • हालाँकि मात्रा के संदर्भ में मीथेन CO₂ की तुलना में कम है, लेकिन मीथेन की ताप-धारण क्षमता CO2 से लगभग 28-36 गुना अधिक है।
  • मनुष्यों द्वारा जीवाश्म ईंधन जलाए जाने की शुरुआत से पूर्व हवा में मीथेन लगभग 0.7 ppm था। वर्तमान में यह मान 1.9 ppm से अधिक है और तेज़ी से बढ़ता जा रहा है।
  • मीथेन की यह बढ़ी हुई वार्मिंग क्षमता ग्रीनहाउस प्रभाव को तीव्रता प्रदान करती है।

ग्लोबल वार्मिंग को सीमित करने में चुनौतियाँ

  • मीथेन के स्तर में तेज़ी से वृद्धि ग्लोबल वार्मिंग को सुरक्षित स्तर तक सीमित करने के प्रयासों को जटिल बनाती है।
  • बढ़ी हुई मीथेन सांद्रता समग्र ग्रीनहाउस गैस प्रभाव में योगदान करती है, जिससे तापमान में वृद्धि होती है।
  • मीथेन का बढ़ता स्तर ग्रह को खतरनाक तापमान सीमा के करीब पहुँचा सकता है।
  • मीथेन के कारण उत्पन्न होने वाली गर्मी से पर्माफ्रॉस्ट (Permafrost) के पिघलने तथा आर्कटिक सागर की बर्फ के पिघलने से और अधिक मीथेन रिलीज़ हो सकती है, जिससे इसका तापन प्रभाव (Warming Effects) बढ़ सकता है।

पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव

  • बढ़ी हुई मीथेन सांद्रता पारिस्थितिक तंत्र को प्रभावित करने के साथ ही प्राकृतिक प्रक्रियाओं को बाधित कर सकती है तथा जैवविविधता को प्रभावित कर सकती है।
  • कमज़ोर पारिस्थितिकी तंत्र, जैसे- आर्द्रभूमि, मीथेन से संबंधित परिवर्तनों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं।

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