यूके उत्तरी सागर में अधिक जीवाश्म ईंधन ड्रिलिंग करने की योजना बना रहा है, जिससे जलवायु लक्ष्यों के साथ इसके संरेखण को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। उत्तरी सागर संक्रमण प्राधिकरण (एनटीएसए) अपतटीय तेल और गैस लाइसेंसिंग का संचालन कर रहा है , जिसमें 100 से अधिक लाइसेंस दिए जाने की उम्मीद है। इस कदम का उद्देश्य ऊर्जा स्वतंत्रता को बढ़ाना है ।ड्रिलिंग के लिये उद्योगों को विनियमित करने के लिये ज़िम्मेदार उत्तरी सागर संक्रमण प्राधिकरण (NTSA) 33वें अपतटीय तेल और गैस लाइसेंसिंग दौर की देखरेख कर रहा है।
उत्तरी सागर के बारे में
- उत्तरी सागर उत्तर पश्चिमी यूरोप में स्थित है। इसकी सीमा कई देशों से लगती है, जिनमें पूर्व और उत्तर में नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, जर्मनी, नीदरलैंड एवं बेल्जियम तथा यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं।
- यह डोवर जलसंधि और इंग्लिश चैनल द्वारा अटलांटिक से जुड़ा हुआ है, साथ ही ऑर्कनी तथा शेटलैंड द्वीपों व शेटलैंड द्वीपों एवं नॉर्वे के मध्य सीधा महासागर में मिलता है।
प्रष्ठभूमि
- महाद्वीपीय जलमग्न सीमा पर 1958 का जिनेवा कन्वेंशन पहला अंतर्राष्ट्रीय कानून था जिसने समुद्र तट से सटे महाद्वीपीय सीमा पर देशों के अधिकारों को स्थापित किया और उत्तरी सागर में अन्वेषण का मार्ग प्रशस्त किया।
- UK की संसद के महाद्वीपीय जलमग्न सीमा अधिनियम,1964 ने अपने तटों के समीप समुद्र तल के नीचे तेल और गैस संसाधनों पर देश के अधिकार क्षेत्र को मज़बूत किया।ब्रिटिश पेट्रोलियम (BP) ने 1964 में UK के उत्तरी सागर में पहला अन्वेषण लाइसेंस हासिल किया, जिससे अगले वर्ष प्राकृतिक गैस की खोज हुई।
- हालाँकि ड्रिलिंग कार्यों को असफलताओं का सामना करना पड़ा, विशेष रूप से 1965 में बीपी-संचालित सी जेम ड्रिलिंग रिग का ढहना।इसके बाद 1970 में स्कॉटलैंड के एबरडीन के पूर्व में फोर्टीज़ फील्ड में वाणिज्यिक तेल की खोज की गई और उत्तरी सागर में अगले दशकों में विभिन्न कंपनियों के अन्वेषण प्रयासों में वृद्धि देखी गई।
